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प्रयागराज की बारा तहसील अंतर्गत चिल्ला गौहानी गांव में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान के विलय के प्रस्ताव को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिससे गांव में हड़कंप मच गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम विकास अधिकारी ने नए जीओ का हवाला देकर, बिना उनकी सहमति के दो कोटे की दुकानों को एक में विलय करने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। ग्राम विकास अधिकारी ने सर्वे के नाम पर कागजों में दोनों दुकानों को एक ही स्थान पर और लाभार्थियों की संख्या कम दर्शाया है, जबकि हकीकत में ये दुकानें गांव के अलग-अलग छोर पर स्थित हैं। इनमें से एक दुकान बबुरी मौजे की तरफ और दूसरी मुख्य चिल्ला में है, जिससे दुकानों का विलय होने पर सैकड़ों लाभार्थियों को राशन लेने के लिए 4-5 किलोमीटर दूर जाना पड़ेगा।
ग्रामीण दिनेश और प्रधान प्रतिनिधि शनि यादव का आरोप है कि अधिकारी जीओ लोकेशन के नाम पर रात में जाकर फोटो खींच रहे हैं ताकि दुकानें बंद दिखें और यह पूरा खेल सिर्फ कमीशन के लिए किया जा रहा है। गांव की महिलाओं ने भी इस पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि पहले ही राशन समय पर नहीं मिलता और यदि दुकानें एक हो गईं, तो उन्हें दिनभर लाइनों में खड़ा रहना पड़ेगा, जिससे बुजुर्गों और दिव्यांगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
इस फर्जीवाड़े की खबर फैलते ही सैकड़ों ग्रामीणों ने बारा तहसील पहुंचकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा और इस प्रस्ताव को तुरंत निरस्त करने की मांग की। इसके साथ ही ग्रामीणों ने ग्राम विकास अधिकारी और कोटेदार बृजेश कुमार यादव, जो कि एडवोकेट और जिला पंचायत सदस्य भी हैं, की भूमिका की जांच कराने की मांग उठाई है। इस मामले पर एसडीएम बारा ने आश्वासन दिया है कि बिना ग्राम सभा की सहमति के कोई विलय नहीं होगा और जांच में फर्जीवाड़ा मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। खाद्य विभाग के नियमों के अनुसार भी किसी भी दुकान के विलय या निरस्तीकरण के लिए ग्राम सभा में प्रस्ताव पास होना और डीएसओ की अनुमति जरूरी है, जिसके चलते फिलहाल ग्रामीण तहसील प्रशासन के लिखित जवाब का इंतजार कर रहे हैं।
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