🔴 शिवपुरी में अवैध शराब के जखीरे पर उठे सवाल, बड़ी कार्रवाई का इंतजार
शिवपुरी। सागर जिले के बंडा में शराब से हुई मौतों के बाद अब शिवपुरी जिले में भी अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई तेज होती दिखाई दे रही है। अलग-अलग जगहों पर छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में अवैध शराब बरामद होने के मामले सामने आ रहे हैं।
सवाल यह है कि सैकड़ों लीटर अवैध शराब का कारोबार क्या एक-दो दिन में खड़ा हो जाता है? अगर नहीं, तो लंबे समय से चल रहे इस कारोबार की जानकारी जिम्मेदार विभागों को क्यों नहीं हुई?
कार्रवाई के दौरान लगातार अवैध शराब के बड़े जखीरे सामने आ रहे हैं, तो यह भी सवाल उठता है कि आखिर इन कारोबारियों को किसका संरक्षण मिल रहा है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी में कमी है, या फिर कहीं मिलीभगत और कमीशन के आरोपों की जांच की जरूरत है?
अगर प्रशासन या आबकारी विभाग की इसमें कोई भूमिका नहीं है, तो समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या आबकारी विभाग केवल शिकायत या किसी बड़ी घटना के बाद ही सक्रिय होगा?
अवैध शराब से किसी बड़ी दुर्घटना या जनहानि का इंतजार करने के बजाय प्रशासन को जिलेभर में अभियान चलाकर अवैध शराब के स्रोत, सप्लाई नेटवर्क और संरक्षण देने वालों की जांच करनी चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल—शिवपुरी में अवैध शराब का कारोबार आखिर किसकी शह पर चल रहा है?
नोट: मिलीभगत या कमीशन से जुड़े आरोपों को जांच के तथ्य सामने आने तक आरोप/सवाल के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
🔴 शिवपुरी में अवैध शराब के जखीरे पर उठे सवाल, बड़ी कार्रवाई का इंतजार
शिवपुरी। सागर जिले के बंडा में शराब से हुई मौतों के बाद अब शिवपुरी जिले में भी अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई तेज होती दिखाई दे रही है। अलग-अलग जगहों पर छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में अवैध शराब बरामद होने के मामले सामने आ रहे हैं।
सवाल यह है कि सैकड़ों लीटर अवैध शराब का कारोबार क्या एक-दो दिन में खड़ा हो जाता है? अगर नहीं, तो लंबे समय से चल रहे इस कारोबार की जानकारी जिम्मेदार विभागों को क्यों नहीं हुई?
कार्रवाई के दौरान लगातार अवैध शराब के बड़े जखीरे सामने आ रहे हैं, तो यह भी सवाल उठता है कि आखिर इन कारोबारियों को किसका संरक्षण मिल रहा है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी में कमी है, या फिर कहीं मिलीभगत और कमीशन के आरोपों की जांच की जरूरत है?
अगर प्रशासन या आबकारी विभाग की इसमें कोई भूमिका नहीं है, तो समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या आबकारी विभाग केवल शिकायत या किसी बड़ी घटना के बाद ही सक्रिय होगा?
अवैध शराब से किसी बड़ी दुर्घटना या जनहानि का इंतजार करने के बजाय प्रशासन को जिलेभर में अभियान चलाकर अवैध शराब के स्रोत, सप्लाई नेटवर्क और संरक्षण देने वालों की जांच करनी चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल—शिवपुरी में अवैध शराब का कारोबार आखिर किसकी शह पर चल रहा है?
नोट: मिलीभगत या कमीशन से जुड़े आरोपों को जांच के तथ्य सामने आने तक आरोप/सवाल के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
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