*सरकार से सीधा सवाल – हिम्मत है तो जवाब दे!*
क्या सरकार मूल राष्ट्रीय जनगणना 1931 को आधार बनाकर विधानसभा चुनाव 2027 से पहले ईमानदारी से जाति जनगणना करवाते हुए, संख्यात्मक आरक्षण / हिस्सेदारी वंचित अतिपिछड़े उपेक्षित वर्गों को (शिल्पकार मझवार तुरैहा गोंड धनगर दुसाध समूहों के रूप में)EWS की भांति निर्विवाद रूप से दे सकती है ?
*यदि नहीं, तो पुनः सत्ता का स्वप्न देखना बंद करे।*
1931 के बाद से आज तक कुम्हार, नाई, लोहार, माली, केवट, निषाद, राजभर ,कहार, राजमिस्त्री आदि जैसे अतिपिछड़े समाजों की गिनती ही नहीं हुई। बिना गिनती के कैसा न्याय? जब 10% आबादी वाले सवर्णों को बिना किसी आयोग, बिना किसी आंदोलन के रातों-रात 10% EWS आरक्षण दिया जा सकता है, तो 40% से ज्यादा आबादी वाले अतिपिछड़ों को उनकी संख्या के अनुपात में हक क्यों नहीं ?
हम भीख नहीं, हमारा संवैधानिक हक मांग रहे हैं।
*2027 से पहले जाति जनगणना कराओ, जिसकी जितनी संख्या उसकी उतनी हिस्सेदारी दो – वरना अतिपिछड़ा समाज जवाब देना जानता है।*
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