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बस्ती के दसिया गांव में प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री के विरोध में किसानों, स्थानीय नागरिकों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने प्रदर्शन कर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। समाजवादी पार्टी के सांसद, क्षेत्रीय विधायक, किसान सभा और माकपा (मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी) के प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित किसानों के साथ मिलकर उप जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया और इस विवादित फैक्ट्री के प्रस्ताव पर तुरंत पुनर्विचार करने की मांग उठाई।
ज्ञापन में स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि स्थानीय किसानों और ग्रामीणों की गंभीर आपत्तियों को देखते हुए इस प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री को औद्योगिक क्षेत्र में स्थानांतरित किया जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह एथेनॉल फैक्ट्री केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के खतरनाक उद्योगों की ‘रेड कैटेगरी’ में शामिल है, इसलिए इसे घनी आबादी के पास स्थापित करना जनहित के खिलाफ है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि संबंधित भूमि पर उद्योग संचालक कोई अन्य उपयुक्त और सुरक्षित उद्योग स्थापित कर सकते हैं। इसके अलावा, माकपा और किसान सभा के प्रतिनिधियों ने मांग की है कि ग्राम पंचायत व जिला पंचायत द्वारा दिए गए सहमति पत्र और अनुमोदन की खुली बैठक बुलाकर पुनर्समीक्षा कराई जाए, ताकि स्थानीय जनता की आपत्तियों और सुझावों पर पूरी पारदर्शिता से फैसला लिया जा सके।
आंदोलनकारियों ने प्रदर्शन के दौरान प्रशासन से हिरासत में लिए गए किसानों को तत्काल रिहा करने और उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 163 के तहत की गई कार्रवाई को तुरंत निरस्त करने की मांग भी की। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले किसानों पर ऐसी कार्रवाई करना कतई उचित नहीं है। इस धरना-प्रदर्शन में किसान सभा के संयोजक केशव राम चौधरी, माकपा के जिला सचिव शेष मणि, के.के. तिवारी, राम सहाय, प्रहलाद, शिवचरण निषाद, नवनीत यादव, वैदिक द्विवेदी, ओमेंद्र और विजय नाथ तिवारी सहित भारी संख्या में किसान और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
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