कुम्हार – मानव सभ्यता का पहला वैज्ञानिक और सर्वश्रेष्ठ शिल्पी – समाजसेवी अनिल कुमार प्रजापति जनपद संतकबीरनगर उत्तर प्रदेश।
*1. कबीला युग से पहले का वैज्ञानिक:*
कुंभकारी मानव इतिहास के सबसे पुराने आविष्कारों में से एक है, जिसकी शुरुआत नवपाषाण युग से हुई। जब मानव कबीला छोड़कर स्थायी जीवन की ओर बढ़ा, तो सबसे पहले उसे चाहिए था – अनाज रखने के लिए बर्तन, पानी रखने के लिए घड़ा। ये दिया कुम्हार ने।
*2. चाक का आविष्कार – दुनिया की पहली मशीन:*
कुम्हार का चाक, जो मिट्टी के बर्तनों के अधिक कुशल आकार के लिए एक प्रमुख तकनीकी नवाचार है, लगभग 4700 ईसा पूर्व में मेहरगढ़ में पेश किया गया था। मेहरगढ़ वही स्थान है जहाँ प्राचीनतम कृषि के साक्ष्य मिले हैं। यानी पहिये का पहला रूप चाक ही था, जिससे बाद में रथ, गाड़ी और पूरा विज्ञान बना।
*3. सिंधु घाटी में कुम्हार की बादशाहत:*
मोहनजोदड़ो में मिला रंगीन मिट्टी का घड़ा कुम्हार के चाक पर बनाया गया था, आकार को कुम्हार की चतुर उंगलियों के दबाव से ढाला गया। वहीं बर्तन बनाना उस समय का प्रमुख शिल्प था। सिंधु घाटी की नगरीय सभ्यता की नींव ही पकी हुई ईंट और मिट्टी के बर्तन थे।
*4. फिर आई जाति-वर्ण की कहानी:*
कुम्हार ने समाज को बर्तन, मकान, अन्न भंडारण, मूर्ति, खिलौना सब दिया। समाज में विभिन्न वर्गों – शासक, व्यापारी, कारीगर की उपस्थिति तभी बनी। कुम्हार कारीगर वर्ग का जनक बना। उसके बाद ही जाति, धर्म, वर्ण, मजहब की कहानी शुरू हुई।
*5. विडंबना – आज की दशा शोध का विषय:*
जिसने सर्वसमाज को विज्ञान सहित जीने का आधार दिया, आज उसी का जीवन जीर्ण-शीर्ण है। मिट्टी का मूल्य खत्म, प्लास्टिक का राज। शिल्पकार का हुनर होते हुए भी संख्यात्मक आरक्षण और हिस्सेदारी के बिना वह लाचारी में जी रहा है।
इसीलिए हमारा नारा यही है – *शिल्पकार को उसका गौरव और हिस्सेदारी लौटानी ही होगी।*
#KumharItihas #MehargarhSeSindhuGhatiTak #ShilpkarSamaj #AnilPrajapati
अपना राज्य चुनें
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
बिहार
छत्तीसगढ़
दिल्ली
हरियाणा
हिमाचल प्रदेश
जम्मू और कश्मीर
झारखंड
मध्य प्रदेश
राजस्थान
उत्तर प्रदेश
उत्तराखंड