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बस्ती जिले के बस्ती शहर में विकास के तमाम दावों की पोल खुल चुकी है और पूरा शहर बदहाली की मार झेल रहा है। यहाँ ‘स्मार्ट सिटी’ का सपना महज कागजी साबित हो रहा है, जहाँ जनता गंदगी, कीचड़ और जलभराव के कारण नरकीय जीवन जीने को मजबूर है। सड़कों पर निकलना किसी खतरे से खाली नहीं है क्योंकि एक तरफ सड़कों पर कीचड़ और गंदा पानी भरा है, तो दूसरी तरफ आसमान को ढके बिजली के तारों का खतरनाक ‘मकड़जाल’ मौत बनकर लटक रहा है। पहली ही बरसात ने सफाई और जल निकासी के दावों की कलई खोलकर रख दी है।
इस घोर अव्यवस्था के बीच सबसे दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि नगर पालिका और बिजली विभाग अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के बजाय एक-दूसरे पर दोष मढ़ने में व्यस्त हैं। तारों के जाल को व्यवस्थित करने और जल निकासी के लिए नालों की सफाई करने जैसे सवालों पर दोनों ही विभाग ‘तू-तू, मैं-मैं’ कर रहे हैं और अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। विभाग अपनी खींचतान में मस्त हैं और जनता भारी टैक्स चुकाने के बावजूद इस जानलेवा गंदगी और असुरक्षित माहौल में रहने को मजबूर है।
नालियां चोक होने से सड़कों पर बह रहा गंदा पानी अब संक्रामक बीमारियों को खुला न्योता दे रहा है, जिससे स्वास्थ्य और सुरक्षा का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। ऐसा लगता है कि बस्ती प्रशासन गहरी कुंभकर्णी नींद में सो रहा है और किसी बड़े हादसे या महामारी का इंतजार कर रहा है। प्रशासन की इस चुप्पी से जनता में गहरा आक्रोश है। जनता अब स्पष्टीकरण नहीं बल्कि त्वरित समाधान चाहती है। यदि जल्द ही तारों को व्यवस्थित कर जल निकासी की पुख्ता व्यवस्था नहीं की गई, तो आक्रोशित जनता सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होगी।
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