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मध्य प्रदेश के बालाघाट में एथेनॉल प्लांट भेजने के नाम पर हजारों क्विंटल सरकारी चावल गायब करने का एक बड़ा खेल सामने आया है। बालाघाट के नवेगांव एफसीआई (FCI) और गर्रा सीडब्ल्यूसी (CWC) गोदाम से छिंदवाड़ा के एथेनॉल प्लांट के लिए भेजा गया चावल रास्ते से ही गायब कर राइस मिलों में खपा दिया गया। इस मामले में पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा के नेतृत्व में गठित एसआईटी (SIT) ने अब तक 17 खाली ट्रक जब्त किए हैं और 50 से अधिक लोगों से पूछताछ की जा रही है।
इस मामले में प्लांट कर्मियों और ट्रांसपोर्टर सहित 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, वारासिवनी के संचेती राइस मिल के संचालक पिता-पुत्र फिलहाल फरार हैं, जिनके खिलाफ वारंट जारी किया गया है। इसके अलावा, अब तक बालाघाट के 6 और सिवनी के 2 राइस मिलर्स भी इस जांच के दायरे में आ चुके हैं।
यह घोटाला बेहद शातिर तरीके से चल रहा था, जिसमें सरकार से ₹2,320 प्रति क्विंटल में मिलने वाला चावल प्लांट संचालक ₹2,600 से ₹3,000 रुपये में मिलर्स को बेच देते थे। इसके बाद मिलर्स बिना किसी मेहनत और खर्च के इसी चावल को दोबारा धान मिलिंग के नाम पर सरकारी राशन गोदामों में जमा करा देते थे। इस सिंडिकेट में शामिल कई लोगों के राजनीतिक संबंध होने के कारण इसके तार भोपाल तक जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।
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