माण्डविया हनुमान मंदिर के चंदे, चढ़ावे और आभूषणों को लेकर विवाद गहराया, दोवडा थाने पहुँचा मामला
पूर्व सरपंच काना भाई परमार बोले — मंदिर की पाई-पाई का हिसाब सुरक्षित, सोने-चांदी के गायब आभूषणों से ध्यान भटकाने के लिए रची गई साजिश
संवाददाता – संतोष व्यास
डूंगरपुर। जिले के पंचायत समिति दोवडा की ग्राम पंचायत पालमांडव स्थित प्रसिद्ध माण्डविया हनुमान मंदिर में दानपेटी की राशि, आय-व्यय के ब्योरे और सोने-चांदी के बहुमूल्य आभूषणों के रखरखाव को लेकर छिड़ा विवाद अब चरम पर पहुँच गया है। गत 10 सितंबर को दोवड़ा पुलिस थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी के जवाब में शुक्रवार को ग्रामीणों एवं मंदिर समिति के सदस्यों ने थानाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले को सिरे से खारिज किया। ग्रामीणों और मंदिर समिति से जुड़े पूर्व पदाधिकारियों ने एफआईआर को पूरी तरह से झूठा, बेबुनियाद, वित्तीय लालच और आगामी स्थानीय राजनीति से प्रेरित करार दिया है।
– पारदर्शी प्रक्रिया के तहत 15-20 गणमान्य लोगों की मौजूदगी में ही खुलती है दानपेटी
मंदिर समिति के सदस्य एवं ग्राम पंचायत पालमांडव के पूर्व सरपंच काना भाई परमार ने बताया कि मंदिर समिति की स्थापना से लेकर अब तक व्यवस्था पूरी तरह से पारदर्शी रही है। दानपात्र की चाबी हमेशा ग्राम पंचायत और समिति के संरक्षण में सुरक्षित रखी जाती है। दानपेटी को कभी भी कोई एक व्यक्ति अकेले नहीं खोल सकता। जब भी दानपात्र खोला जाता है, तब सरपंच या जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ क्षेत्र के 15 से 20 गणमान्य लोगों का समूह मौजूद रहता है। मंदिर की आय-व्यय का पूरा लिखित ब्योरा समिति के सचिव जीवाभाई परमार और मेरे पास सुरक्षित है। मंदिर के निर्माण कार्यों के भुगतान के लिए भी चार जिम्मेदार लोगों की मौजूदगी में ही आपातकालीन स्थिति में दानपात्र खोला जाता है। उन्होंने कहा कि हमने मंदिर की पवित्रता रखी है और एक रुपये का भी हेरफेर नहीं हुआ है।
– 5 से 8 किलो चांदी का हिसाब गायब, हड़पने की नीयत से रचा विवाद!
पूर्व सरपंच और समिति सदस्यों ने पलटवार करते हुए विपक्षी गुट पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि शनिवार और मंगलवार को श्रद्धालुओं द्वारा हनुमान जी के दरबार में चढ़ाए जाने वाले सोने-चांदी के बहुमूल्य आभूषणों का विपक्षी गुट द्वारा सही हिसाब नहीं दिया जा रहा है। वर्तमान में मंदिर के पास जमा लगभग 5 से 8 किलो चांदी का हिसाब गायब है। काना भाई परमार का आरोप है कि इसी 5 से 8 किलो चांदी और चढ़ावे की बहुमूल्य सामग्री को छिपाने व हड़पने की नीयत से यह पूरा मनगढ़ंत विवाद खड़ा किया गया है, ताकि जनता का ध्यान मूल मुद्दे से भटकाया जा सके।
– रजिस्ट्रेशन न होने की बौखलाहट और बाहरी हस्तक्षेप का आरोप
दोवड़ा थानाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि मंदिर समिति का पुनर्गठन 12 अप्रैल 2023 को हुआ था। इसके बाद नई समिति बनाकर उसका पंजीकरण करवाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन किन्हीं कारणों से रजिस्ट्रेशन पूरा नहीं हो सका। इसी बौखलाहट में आकर मंदिर समिति के संरक्षक सुंदरलाल परमार ने सचिव जीवाभाई, पूर्व सरपंच काना भाई और ऐतिहासिक हनुमान मंदिर को बदनाम करने की नीयत से 10 सितंबर को थाने में झूठी रिपोर्ट दर्ज करवा दी।
इसके साथ ही, पाल के 9 वारा वाले क्षेत्रों को मिलाकर सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भ्रामक व मनगढ़ंत वीडियो वायरल किए जा रहे हैं। पूर्व सरपंच ने स्पष्ट किया कि इस विवाद में स्थानीय पालमांडव ग्राम पंचायत या स्थानीय ग्रामीणों का कोई विरोध नहीं है, बल्कि बाहरी क्षेत्रों से कुछ लोग आकर माहौल खराब कर रहे हैं और आगामी पंचायत चुनावों में अपने वोटों की राजनीति चमकाने के लिए इस पवित्र धार्मिक स्थल का इस्तेमाल कर रहे हैं।
– आगामी पंचायती राज चुनाव को लेकर गरमाई राजनीति, रंजिश भुनाने का आरोप
मामले में राजनीतिक मोड़ तब आ गया जब पूर्व सरपंच और ग्रामीणों ने इस पूरे विवाद को आगामी पंचायती राज चुनावों से जोड़ दिया। पूर्व सरपंच काना भाई परमार ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में जल्द ही पंचायती राज चुनाव होने वाले हैं और विरोधी गुट अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने के लिए इस पवित्र मंदिर को मोहरा बना रहा है। उन्होंने कहा कि गांव और समाज में अपनी राजनीतिक रंजिश भुनाने और जनसमर्थन हासिल करने की नीयत से कुछ स्थानीय व बाहरी तत्व सुनियोजित तरीके से भ्रामक अफवाहें फैला रहे हैं। धार्मिक स्थल के नाम पर लोगों की भावनाओं को भड़काकर वोट बैंक की राजनीति चमकाने का यह प्रयास किया जा रहा है, ताकि आने वाले चुनावों में इसका राजनीतिक लाभ उठाया जा सके।
– ग्रामीणों ने की निष्पक्ष जांच की मांग
दोवड़ा थाने पहुंचे दर्जनों ग्रामीणों और मंदिर समिति के सदस्यों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मामले की गहनता और निष्पक्षता से जांच की जाए। झूठी रिपोर्ट दर्ज कराकर और भ्रामक वीडियो वायरल कर धार्मिक स्थल की साख बिगाड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। ज्ञापन प्रस्तुत करते समय अध्यक्ष दलपत परमार, पूर्व सरपंच काना भाई परमार, बदा परमार, वासुदेव, छोटेलाल, मोहनलाल, नारायण, हीरालाल, रमेशचंद्र, शांतिलाल, लक्ष्मण, केशवलाल, पेमजी, कल्लाजी, मणिलाल, पुरुषोत्तम, जीतमल, शंकरलाल, गटुलाल, हुकमा, मावजी, मोहनलाल खराड़ी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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