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सहरसा में कानून व्यवस्था का पूरी तरह से जनाजा निकल चुका है और अब शहर के बीचों-बीच स्थित मुख्य बाजार और पॉश इलाके भी सुरक्षित नहीं रह गए हैं। सहरसा के रघुजी कॉलोनी में सुबह-सुबह सरेआम फायरिंग की जा रही है, तो वहीं अस्पताल में सुरक्षा गार्डों द्वारा मरीजों की बेरहमी से पिटाई की जा रही है। इसके साथ ही, डॉक्टरों के घरों में लगातार चोरियां हो रही हैं और कृष्णा नगर में व्यापार संघ अध्यक्ष अर्जुन चौधरी के स्टाफ पर दिनदहाड़े गोलियां बरसाई गई हैं। हद तो यह है कि पुलिस चौकी से महज चंद कदम की दूरी पर स्थित तिवारी टोला में व्यापारियों की जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई को सरेआम लूटा जा रहा है।
ऐसे में यह बड़ा सवाल उठता है कि जिस सहरसा जिले को खुद डीआईजी (DIG) साहब ने गोद लिया है, वहां अपराधियों के हौसले इतने बुलंद कैसे हो गए? पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर तीखे सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर अपराधियों को पकड़ने में इतनी ढील क्यों दी जा रही है, जबकि सच की आवाज उठाने वाले पत्रकारों और आम नागरिकों को अरेस्ट करने में पुलिस इतनी फुर्ती दिखा रही है। क्या पुलिस की यह मुस्तैदी सिर्फ एक कागजी दिखावा बनकर रह गई है? इस सोई हुई व्यवस्था को जगाने के लिए लोग सोशल मीडिया पर लगातार अपनी आवाज उठा रहे हैं।
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