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एनकाउंटर से ठीक एक दिन पहले क्रांतिवीर भरतभूषण तिवारी ने पूरे भारतवर्ष के लिए एक विशेष संदेश दिया था, जिसे उन्होंने अद्वितीय बताया, कहते हुए कि ‘न ऐसा संदेश सुना होगा और न सुनोगे।’ उन्होंने अपना यह संदेश अपने एनकाउंटर से ठीक पहले छोड़ा था, जिसे लोगों से सुनने का आग्रह किया गया है।
इस क्रांतिवीर का पैतृक गांव बिलोटी है। जिस स्थान पर उन पर फायरिंग की गई थी, उसे जवनिया और बिलोटी गांव के निवासियों ने एक पूज्य स्थान घोषित कर ईंटों से घेर दिया है। ग्रामीणों द्वारा इसी जगह पर उनका एक स्मारक घेरा बनाने की योजना है, साथ ही यह भी घोषणा की गई है कि इस गांव का नाम बदलकर ‘भरततिवारी’ रखा जाएगा।
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