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राजस्थान की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में सोमवार को एक सनसनीखेज हत्याकांड हुआ, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। चंबल के बीहड़ों में दशकों तक आतंक का पर्याय रहे कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की जेल के भीतर ही हत्या कर दी गई। चौंकाने वाली बात यह है कि हत्या उसी बैरक में बंद एक अन्य हार्डकोर कैदी विष्णु ने की, जिसके साथ जगन ने कुछ देर पहले तक लूडो खेला था और सामान्य तरीके से समय बिताया था।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, भरतपुर के चर्चित कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु और डकैत जगन गुर्जर एक ही बैरक में बंद थे। सोमवार सुबह दोनों ने बैरक की सफाई की और साथ बैठकर लूडो खेला, लेकिन कुछ ही घंटों बाद उसी बैरक से जगन गुर्जर का शव मिला। शुरुआती जांच में सामने आया है कि विष्णु ने तौलिए से जगन का गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। जब जेल स्टाफ राउंड पर पहुंचा तो जगन मृत अवस्था में पड़ा था। पूछताछ में विष्णु ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपना जुर्म कबूलते हुए कहा कि “मैंने ही उसे मार डाला।” जेल प्रशासन के मुताबिक, जगन गुर्जर मार्च 2026 से अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में बंद था, जबकि विष्णु पिछले तीन वर्षों से इसी जेल में कैद था। एफएसएल टीम ने मौके से साक्ष्य जुटा लिए हैं।
पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला ने बताया कि शुरुआती जांच में यह गैंगवार का मामला नहीं लग रहा है। प्रथम दृष्टया यह हत्या दोनों कैदियों के बीच हुए आपसी विवाद का परिणाम प्रतीत होती है। सूत्रों के मुताबिक, सुबह नाश्ते के दौरान दोनों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हुई थी। पूछताछ में विष्णु ने बताया कि जगन अक्सर उसे ताने मारता था और मानसिक रूप से परेशान करता था, जिसके कारण उसने रंजिश में इस वारदात को अंजाम दिया। जेल सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा कारणों से जगन गुर्जर को दिन में सामान्य बैरक में रखा जाता था, जबकि रात के समय उसे विशेष सुरक्षा सेल में शिफ्ट किया जाता था।
धौलपुर के डांग क्षेत्र के भवूतीपुरा गांव का रहने वाला जगन गुर्जर करीब 32 साल पहले अपराध की दुनिया में उतरा था। वर्ष 1994 में अपने जीजा के हत्यारों की हत्या के बाद उसने चंबल के बीहड़ों में अपना गैंग बना लिया और जल्द ही राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के सबसे खूंखार डकैतों में शामिल हो गया। उसके खिलाफ हत्या, अपहरण, फिरौती, लूट, डकैती और पुलिस पर हमलों समेत 100 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे। वर्ष 2008 के गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान उसने तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के धौलपुर महल को उड़ाने की धमकी देकर सनसनी फैलाई थी, जिस पर 11 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। 2019 में उस पर दो महिलाओं के साथ मारपीट कर उन्हें निर्वस्त्र कर गांव में घुमाने का गंभीर आरोप भी लगा था। जगन ने कई बार अपराध छोड़ने का दावा किया और वर्ष 2001, 2009, 2018 और 2022 में आत्मसमर्पण भी किया, यहाँ तक कि अपनी बेटी की शादी के समय उसने अपराध की दुनिया छोड़ने की कसम भी खाई थी, लेकिन हर बार जमानत पर बाहर आने के बाद वह फिर से अपराध के रास्ते पर लौट गया।
चंबल के बीहड़ों में वर्षों तक खौफ का दूसरा नाम रहा जगन गुर्जर अब जेल की सलाखों के पीछे अपनी ही बैरक में मारा गया है। जिस अपराध की दुनिया ने उसे पहचान दी, उसी दुनिया का अंत भी हिंसक तरीके से हुआ। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल के भीतर आखिर ऐसी वारदात कैसे हो गई? क्या यह सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक थी या यह केवल दो कैदियों के बीच विवाद का नतीजा था? इन सभी सवालों के जवाब अब विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
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