बेबसी की मार झेल रहा दिव्याग परिवार अब तो सुन लो सरकार नसर पर छत में आशियाने के लिए जमीन चारों बजे दिव्यांग बीमारी से जूझ रहा
बेबसी की मार झेल रहा दिव्यांग ब्राह्मण परिवार, अब तो सुन लो सरकार
– न सिर पर छत, न आशियाने के लिए जमीन; चारों बच्चे दिव्यांग, बीमारी से जूझ रहा परिवार
– भूखे बच्चों का पेट भरने के लिए मां कभी मजदूरी तो कभी भीख मांगने को मजबूर
बस्ती। किस्मत ने पहले ही ऐसा दर्द दिया कि जिंदगी मुश्किल हो गई, लेकिन सरकारी तंत्र की बेरुखी ने इस परिवार की बेबसी को और गहरा कर दिया है। नगर पंचायत के वार्ड नंबर 10 भगत सिंह नगर के भैरोपुर निवासी राम कृष्ण मिश्र का परिवार आज भी सिर पर छत और पैरों के नीचे जमीन के लिए तरस रहा है। परिवार की हालत ऐसी है कि न तो रहने के लिए अपना घर है और न ही आशियाना बनाने के लिए एक धुर जमीन।
राम कृष्ण मिश्र अपनी पत्नी गुड़िया और चार बच्चों के साथ वर्षों से पन्नी तानकर गुजर-बसर कर रहे हैं। परिवार की सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि चारों बच्चे दिव्यांग हैं। वे न ठीक से चल पाते हैं और न ही बोल पाते हैं। बच्चों की देखभाल और रोजमर्रा की जरूरतों का पूरा बोझ माता-पिता पर है।
मुसीबत यहीं खत्म नहीं हुई। कुछ समय पहले राम कृष्ण मिश्र को फालिज का दौरा पड़ा। इलाज के बाद अब वह किसी तरह थोड़ा-बहुत चल पा रहे हैं, लेकिन पूरी तरह स्वस्थ होकर काम करने की स्थिति में नहीं हैं। दूसरी ओर पत्नी गुड़िया परिवार का पेट पालने के लिए मजदूरी करती हैं। जब मजदूरी का काम नहीं मिलता अथवा उससे परिवार का खर्च नहीं चलता तो वह अपने बच्चों का पेट भरने के लिए भिक्षा मांगने तक को मजबूर हो जाती हैं।
परिवार की स्थिति देखकर सहज ही सवाल उठता है कि आखिर सरकारी योजनाओं का लाभ उन लोगों तक कब पहुंचेगा, जिन्हें उसकी सबसे अधिक जरूरत है। एक ओर सरकार दिव्यांगजनों, गरीबों और बेसहारा परिवारों के लिए तमाम योजनाएं संचालित कर रही है, वहीं दूसरी ओर यह परिवार वर्षों से बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन गुजारने को विवश है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय है। चारों बच्चों की दिव्यांगता के कारण उनकी देखभाल में भी अतिरिक्त खर्च होता है। ऐसे में परिवार के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना भी किसी चुनौती से कम नहीं है।
अब सवाल यह है कि जिले के जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इस परिवार पर कब पड़ेगी? क्या प्रशासन इस बेबस परिवार को आवास के लिए भूमि, पक्का आशियाना, दिव्यांग बच्चों को नियमानुसार मिलने वाली सुविधाएं और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाएगा? या फिर राम कृष्ण मिश्र का परिवार इसी तरह पन्नी के नीचे जिंदगी काटने को मजबूर रहेगा?
भैरोपुर का यह परिवार सिर्फ सहायता का मोहताज नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और सम्मानजनक जीवन की उम्मीद लगाए सरकार और प्रशासन की ओर देख रहा है। जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी तत्काल मामले का संज्ञान लेकर परिवार की वास्तविक स्थिति की जांच करें और पात्रता के अनुसार सरकारी सहायता उपलब्ध कराएं।
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