विविधता में भी एकता भारत देश का इतिहास है जिस बात की पुष्टि हमारे गांव के ऋतुराज प्रजापति की मृत्यु ने कर दिया। उनका पुरा परिवार बाहर रहता है लेकिन मरणोपरांत गांव गांव होता है यह संस्कृति आज भी बरकरार है, नजारा देखने को मिला यानी जीते जी विभिन्न विचारधारा के बावजूद परिजनों के आने तक लाश का रखरखाव व अंत्येष्टि का प्रबंध नजीर बना। बेशक फूट डालो राज करो निति आज भी प्रभावी हो किन्तु लोकसभा चुनाव 2024 में एक तिहाई अंतर से भाजपा का मजबूत किला ढहाकर ग्राम पंचायत महोबरा ने रिकॉर्ड बनाया कि जब शासन सत्ता निरंकुश हो जाए तो सर्वसमाज बदलाव का अभिप्राय बन जाता है। यैसे में यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि जिस निचले पायदान को तानाशाह अपनी जागीर समझते चले आ रहे थे वक्त आने पर वहीं परिवर्तन का कारण बन जाता है। ओम् शांति एवं शत् शत् नमन 🙏
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