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बिहार में गंगा नदी पर औंटा (मोकामा) और सिमरिया (बेगूसराय) के बीच ₹1870 करोड़ की लागत से सबसे बड़ा पुल बनाया गया है। इस 8.15 किलोमीटर लंबे हाईवे प्रोजेक्ट को तैयार करने में लगभग 3 साल का समय लगा है, जिसमें 1.86 किलोमीटर लंबा मुख्य पुल भी शामिल है। इस पुल के समानांतर ही राजेंद्र सेतु (हाथीदह) नाम का पुराना पुल मौजूद है, जिसे देश का पहला ‘डबल-डेकर’ पुल कहा जाता है, जिसके निचले हिस्से में रेलगाड़ी और ऊपरी हिस्से पर सड़क मार्ग है। इस पुराने राजेंद्र सेतु का उद्घाटन साल 1959 में हुआ था और इसकी निर्माण लागत लगभग ₹18 करोड़ थी।
इस नए पुल के उद्घाटन के कुछ ही समय बाद इसके कुछ हिस्सों में दरारें आने और धंसने जैसी गंभीर तकनीकी समस्याएं देखी गई हैं। विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों ने निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। राज्य में बुनियादी ढांचे के ढहने की घटनाओं के कारण ठेकेदारों और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर काफी सवाल उठ रहे हैं। वहीं, इसे बिहार में बना 18070 करोड़ रुपये का एशिया का सबसे बड़ा डबल डेकर ब्रिज भी बताया जा रहा है।
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