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चक्का जाम का ऐलान होने के बावजूद कुछ ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों द्वारा ड्राइवरों को माल लोड करने भेजने पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। जब रास्तों पर ड्राइवरों को रोककर उन्हें चुनरी और चूड़ियां पहनाकर बेइज्जत किया जाता है, तो सबसे बड़ा नुकसान और अपमान इन मेहनतकश ड्राइवरों का ही होता है। जबकि हकीकत यह है कि माल लोड करवाने और भेजने का यह फैसला ड्राइवरों का नहीं, बल्कि ट्रांसपोर्ट मालिकों का होता है।
इस परिस्थिति में ड्राइवरों को बीच में फंसाकर उनका अपमान करने को किसी भी समस्या का समाधान नहीं माना जा सकता। विरोध जताने के लिए ड्राइवरों के बजाय सीधे जिम्मेदार लोगों से सवाल पूछने की जरूरत है। सभी पक्षों से अपील की गई है कि वे आपसी संवाद और समझदारी के साथ इस मसले का समाधान निकालें, ड्राइवरों का सम्मान हर हाल में बनाए रखें और किसी भी तरह के अनावश्यक विवाद से बचें।
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