इंदौर सेंट्रल जेल से जलवा एक्सप्रेस के लिए मंजर पठान की रिपोर्ट।
सेंट्रल जेल में गूंजा राखी का त्यौहार सलाखों के पीछे भी जिंदा है भाई-बहन का प्यार
रक्षाबंधन…
भाई-बहन के अटूट रिश्ते का त्यौहार। लेकिन जब भाई सलाखों के पीछे हो, तब भी बहन का प्यार कम नहीं होता। ऐसी ही भावुक तस्वीरें सामने आई हैं सेंट्रल जेल से, जहाँ जेल प्रशासन ने कैदियों के लिए राखी उत्सव का आयोजन किया।तस्वीरें इंदौर सेंट्रल जेल की हैं। यहाँ राखी के पावन पर्व पर एक अलग ही नजारा देखने को मिला।
सैकड़ों बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने जेल पहुंचीं। किसी की आँखों में इंतजार था, तो किसी के चेहरे पर वर्षों बाद मिलने की खुशी।जेल प्रशासन की तरफ से विशेष व्यवस्था की गई थी। बहनों के लिए बैठने की व्यवस्था, मिठाई और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम।एक बहन ने कहा भाई चाहे कहीं भी हो, हमारे लिए तो वही प्यारा भाई है। राखी का फर्ज तो निभाना ही है।वहीं एक कैदी भाई की आँखें भी नम हो गईं।बोला आज के दिन एहसास हुआ कि जेल की दीवारें रिश्तों को नहीं रोक सकतीं।जेल अधीक्षक (काल्पनिक नाम डाल लेना हमने कोशिश की है कि त्यौहार के दिन कोई कैदी खुद को अकेला महसूस ना करे। परिवार ही सुधार की पहली सीढ़ी है।सच ही कहा गया है रिश्ते खून से नहीं, दिल से बनते हैं।और राखी का ये धागा, जेल की ऊँची दीवारों से भी ज्यादा मजबूत है।इंदौर सेंट्रल जेल से जलवा एक्सप्रेस के लिए मंजर पठान की रिपोर्ट।
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