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बिलासपुर जिले के डड़हा बोदरी गांव में स्थित एक सड़क वर्षों से क्षेत्रवासियों के लिए मुसीबत का सबब बनी हुई है। बिलासपुर हाई कोर्ट और एयरपोर्ट के पास, नगर पालिका परिषद बोदरी के वार्ड क्रमांक 10 में यह जर्जर सड़क खासकर बरसात में कीचड़ और बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो जाती है, जिससे पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के साथ-साथ स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और मरीजों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई जगहों पर सड़क पूरी तरह जलमग्न हो जाती है, जिससे आपात स्थिति में एम्बुलेंस का गांव तक पहुंचना असंभव हो जाता है और मरीजों को खाट या अन्य साधनों से मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है।
गांव में केवल प्राथमिक विद्यालय (कक्षा 5 तक) होने के कारण, कक्षा 6 से आगे की पढ़ाई के लिए बच्चों को प्रतिदिन चकरभाठा जाना पड़ता है। खराब सड़क और कीचड़ के कारण वे बहुत परेशान होते हैं, और कई छात्र समय बचाने के लिए जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक के किनारे-किनारे पैदल जाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई वर्षों से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
इस गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीणों ने 2023 के विधानसभा चुनाव का बहिष्कार भी किया था, जिसके बाद उन्हें शासन-प्रशासन द्वारा जल्द सड़क बनाने का आश्वासन दिया गया था। इसके बाद बिल्हा के विधायक धरमलाल कौशिक ने इस सड़क का भूमि पूजन भी किया था, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। वार्ड 10 डड़हा के कांग्रेसी पूर्व पार्षद कमलेश नोनिया और ग्रामीणों ने एसडीएम कार्यालय बिल्हा, नगर पालिका बोदरी, कलेक्टर कार्यालय बिलासपुर और सीएम हाउस रायपुर में भी ज्ञापन सौंपे हैं, मगर सड़क नहीं बनी। हाल ही में छत्तीसगढ़ में शुरू हुए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1076 पर गांव के दर्जनों ग्रामीणों ने अपनी शिकायतें दर्ज कराई हैं।
ग्रामीणों ने शासन से वार्ड क्रमांक 10 की सड़क का प्राथमिकता के आधार पर पक्का निर्माण कराने की मांग की है ताकि क्षेत्रवासियों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शिकायत के बावजूद जल्द सड़क निर्माण की दिशा में कार्रवाई नहीं की गई, तो वे लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण ढंग से नयापारा बोदरी हाईकोर्ट के पास आंदोलन करेंगे। उनका कहना है कि सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के लिए लोगों को संघर्ष करना पड़ रहा है, जो विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
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