🔴 कोर्ट के आदेश की अवहेलना पर कौशांबी के CO सत्येंद्र तिवारी के खिलाफ गिरफ्तारी का आदेश
गवाही के लिए बार-बार बुलाने के बावजूद अदालत में पेश नहीं हुए, वेतन रोकने के भी निर्देश
कौशांबी/वाराणसी। वाराणसी की विशेष एससी/एसटी अदालत ने कौशांबी के सिराथू सर्किल में तैनात क्षेत्राधिकारी (CO) सत्येंद्र कुमार तिवारी के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें गिरफ्तार कर 10 सितंबर 2026 को अदालत में पेश करने का आदेश दिया है। अदालत ने उनके वेतन को रोकने के निर्देश भी दिए हैं।
बताया जा रहा है कि मामला वर्ष 2018 के एससी/एसटी एक्ट से जुड़े एक मामले, सत्र परीक्षण संख्या-401/2018 से संबंधित है। इस मामले में सत्येंद्र कुमार तिवारी तत्कालीन विवेचक (IO) थे। अदालत में उनकी गवाही महत्वपूर्ण होने के बावजूद वे लगातार पेश नहीं हो रहे थे।
अदालत द्वारा कई बार उन्हें गवाही के लिए बुलाया गया। बताया गया है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से भी समन भेजे गए, लेकिन इसके बावजूद उनके अदालत में उपस्थित नहीं होने पर न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया। इसी क्रम में अदालत ने गिरफ्तारी कर उन्हें निर्धारित तारीख पर पेश करने के साथ-साथ वेतन रोकने का निर्देश दिया है।
चुनाव के दौरान भी विवादों में रहे CO
CO सत्येंद्र कुमार तिवारी का नाम इससे पहले भी विवादों में रहा है। चुनाव के दौरान प्रत्याशी छेददू चमार के साथ कथित बदसलूकी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो वायरल होने के बाद कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे थे। हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
अपराधियों को संरक्षण देने के आरोपों को लेकर भी उठते रहे सवाल
स्थानीय स्तर पर CO सत्येंद्र कुमार तिवारी पर अपराधियों को संरक्षण देने और मामलों में कार्रवाई न करने के आरोप भी लगते रहे हैं।
वहीं, पिपरी थाना क्षेत्र में हुए पटाखा विस्फोट मामले को लेकर भी उनका नाम चर्चा में आया था। इस घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठे थे।
अब वाराणसी की विशेष एससी/एसटी अदालत के ताजा आदेश के बाद एक बार फिर CO सत्येंद्र कुमार तिवारी चर्चा में हैं। 10 सितंबर को अदालत में उनकी पेशी और आगे होने वाली न्यायिक कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
सवाल यह है कि जब अदालत के बार-बार निर्देश और समन के बावजूद एक पुलिस अधिकारी गवाही के लिए उपस्थित नहीं होता है, तो क्या आम व्यक्ति के लिए न्यायालय के आदेशों के पालन को लेकर अलग मानदंड होना चाहिए?
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