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सतना के सार्थक अस्पताल प्रबंधन पर एक नवजात शिशु के इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने का बड़ा आरोप लगा है। परिजनों के अनुसार, अस्पताल में भर्ती महज डेढ़ घंटे के नवजात शिशु के दस्तावेजों में उसका लिंग लड़के की जगह लड़की दर्ज कर दिया गया। इतना ही नहीं, जन्म के करीब डेढ़ घंटे बाद भर्ती हुए इस शिशु की आयु भी दस्तावेजों में एक माह लिखकर उसका उपचार शुरू कर दिया गया।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की इस गंभीर त्रुटि के कारण नवजात को उसकी वास्तविक उम्र और स्थिति के अनुरूप इलाज नहीं मिल सका। गलत विवरण के आधार पर दवाएं दिए जाने से बच्चे की तबीयत और बिगड़ गई। परिजनों ने आरोप लगाया है कि नवजात को दवा की ओवरडोज़ दी गई, जिसके बाद उसकी हालत काफी चिंताजनक हो गई है। इस घटना के बाद पीड़ित परिवार में अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ भारी आक्रोश है और उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी डॉक्टरों और संबंधित कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल इस गंभीर मामले में सार्थक अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा की जाने वाली जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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