हाईकोर्ट की फटकार के बाद खुली नगर निगम की नींद: कागजों में नालों की सफाई का खुला राज, अब GPR मशीन से तलाशी जा रही ज़मीन के नीचे की हकीकत
बारिश और बाढ़ के दौरान संगम नगरी को जलमग्न करने वाली नगर निगम और जल निगम की घोर लापरवाही आखिरकार बेनकाब हो गई है। मानसून से पहले नालों की तलीझार सफाई के दावों की पोल पहली ही भारी बारिश में खुल गई, जिसके बाद शहरवासियों को नारकीय हालात से गुजरना पड़ा। स्थिति इतनी बदहाल हो गई कि इलाहाबाद हाईकोर्ट को खुद संज्ञान लेकर नगर निगम प्रशासन को कड़ी फटकार लगानी पड़ी। अदालत के सख्त रुख और फजीहत के बाद अब जाकर जिम्मेदार अधिकारी नींद से जागे हैं और खानापूर्ति के लिए सड़कों पर ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (GPR) जैसी मशीनों को घुमाकर भूमिगत नालों की टोह ली जा रही है।
सालों से सिर्फ फाइलों में होती रही सफाईशहर के कई पॉश और निचले इलाकों में हफ्तों तक सीवर और बारिश का गंदा पानी भरा रहा, जिससे महामारि फैलने की आशंका थी
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