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उत्तर प्रदेश के मथुरा के गोवर्धन में गुरुपूर्णिमा से ठीक पहले मुड़िया परिक्रमा मार्ग की हालत बदतर हो गई है, जिससे यह मार्ग एक तरह से मौत का रास्ता बन चुका है। देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर प्रशासन अब भी पूरी तरह मौन बैठा है। चकलेश्वर मंदिर से निकलने वाले मुख्य परिक्रमा मार्ग की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिसमें हकीकत साफ दिखाई दे रही है। बारिश की महज एक बूंद से ही यह पूरा मार्ग कीचड़ के दलदल में तब्दील हो गया है, जिससे लोग इस पवित्र रास्ते की दुर्दशा पर गहरा रोष व्यक्त कर रहे हैं।
इस बदहाल मार्ग पर बुजुर्ग माताएं, बहनें, संत और स्थानीय नागरिक नंगे पैर, हाथ में पूजा की सामग्री और लोटा लेकर दीवार पकड़कर अपनी जान जोखिम में डालते हुए निकलने को मजबूर हैं। सड़क पूरी तरह टूट चुकी है, जहां जगह-जगह गहरे गड्ढे हैं और घुटने तक गंदा पानी व कीचड़ भरा हुआ है। इस दलदल में बाइक और साइकिल सवार गिरते-पड़ते नजर आ रहे हैं। सबसे बड़ा खतरा यह है कि इसी रास्ते से मुड़िया संत की भव्य शोभायात्रा और दंडवती परिक्रमा वाले श्रद्धालु गुजरेंगे। महज आठ दिन बाद होने वाले इस भव्य मेले से पहले अगर सुध नहीं ली गई, तो भारी भीड़ के बीच बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं कीचड़ में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो सकते हैं।
स्थानीय लोगों में इस दुर्दशा को लेकर भारी आक्रोश है और उनका कहना है कि हर साल बारिश से पहले नाली की सफाई के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति की जाती है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए नगर पंचायत गोवर्धन और मथुरा के जिला अधिकारी (DM) से तीन प्रमुख मांगें की गई हैं। पहली मांग के तहत अगले 24 घंटे के भीतर चकलेश्वर से मुड़िया मंदिर तक का पूरा रास्ता कीचड़ मुक्त किया जाए। दूसरी मांग में जेसीबी और पंप लगाकर तत्काल जलभराव निकालने तथा अस्थाई रूप से गिट्टी डालने की बात कही गई है। तीसरी मांग यह है कि गुरुपूर्णिमा से पहले स्थाई नाली निर्माण का टेंडर जारी कर किसी जिम्मेदार अधिकारी की ड्यूटी लगाई जाए। स्थानीय जनता सवाल उठा रही है कि यदि प्रशासन ने अपनी आंखें बंद रखीं, तो श्रद्धालुओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी।
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