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मध्य प्रदेश के मुरैना जिले की पोरसा तहसील स्थित ग्राम पंचायत बुधारा में विकास कार्यों की पोल खुल गई है। 7 जुलाई 2026 को मंजू देवी सखवार के निधन के बाद उनकी अंतिम यात्रा को गांव से श्मशान घाट तक जाने के लिए कीचड़ और दलदल से होकर गुजरना पड़ा। इस घटना के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जो गांव की बदहाल बुनियादी सुविधाओं को दर्शा रहे हैं।
यह समस्या केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे गांव की वर्षों पुरानी त्रासदी है। बरसात के मौसम में यहां की सड़कें और श्मशान मार्ग पूरी तरह जर्जर हो जाते हैं, जिससे ग्रामीणों का जीना मुहाल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार और प्रशासन के विकास के सभी दावे इस जमीनी हकीकत के सामने खोखले साबित हो रहे हैं, जहां अंतिम यात्रा तक सम्मानपूर्वक नहीं निकल पा रही है।
समाजसेवी रिंकू सिलावट ने जिला प्रशासन, जिला पंचायत और जनपद पंचायत से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने प्रशासन से ग्राम बुधारा का सर्वेक्षण कर श्मशान घाट तक पक्की सड़क बनाने और गांव की अन्य जर्जर सड़कों का सुधार करने की अपील की है। यह मांग पूरी तरह से ग्रामीणों के सम्मान और उनके मूलभूत अधिकारों की सुरक्षा को केंद्र में रखकर उठाई गई है।
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