सौहार्द शिरोमणि एवं जगत धर्म चक्रवर्ती संत डॉ सौरभ पाण्डेय की जीवन-दृष्टि को अंतरराष्ट्रीय काव्य में मिली नई पहचान
क्रोएशिया के प्रोफेसर डॉ. इवान गेचिना ने ‘Sant Saurabh: Voice of Universal Harmony’ कृति में शांति, मानवता और विश्व बंधुत्व के संदेश को दिया स्वर
गोरखपुर। सौहार्द शिरोमणि एवं जगत धर्म चक्रवर्ती संत डॉ सौरभ पाण्डेय के जीवन-दर्शन, सामाजिक सरोकारों, सेवा कार्यों और विश्व बंधुत्व की विचारधारा को अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक मंच पर नई पहचान मिली है। क्रोएशिया के प्रोफेसर डॉ. इवान गेचिना, जो बाल्कनोफैंटास्टिका के अध्यक्ष हैं, ने संत सौरभ के जीवन और विचारों पर आधारित काव्यात्मक कृति ‘Sant Saurabh: Voice of Universal Harmony’ का लेखन किया है। इस पुस्तक में संत सौरभ की जीवन-यात्रा को शांति, मानवता, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता से जोड़ते हुए प्रस्तुत किया गया है।
पुस्तक के माध्यम से संत सौरभ के उस विचार को वैश्विक पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है, जिसमें मानवता को सभी सीमाओं से ऊपर रखते हुए समाज में प्रेम, सेवा, सद्भाव और विश्व बंधुत्व की भावना को मजबूत करने पर बल दिया गया है। कृति में उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं के साथ-साथ समाज के लिए किए गए उनके कार्यों और जनजागरण अभियानों का भी उल्लेख किया गया है।
*1,200 से अधिक जन चौपाल कार्यक्रमों का उल्लेख*
कृति में संत सौरभ द्वारा आयोजित 1,200 से अधिक जन चौपाल कार्यक्रमों को विशेष महत्व दिया गया है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से आमजन के बीच सामाजिक जागरूकता, आपसी संवाद और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के प्रयासों को पुस्तक में रेखांकित किया गया है। जन चौपालों को केवल संवाद का माध्यम ही नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को एक-दूसरे के करीब लाने और सामाजिक समस्याओं पर सामूहिक चिंतन का मंच बताया गया है।
पुस्तक में जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता अभियान, रक्तदान, देहदान, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा तथा मानव सेवा जैसे विषयों पर किए गए कार्यों का भी उल्लेख किया गया है। इन गतिविधियों को समाज के प्रति जिम्मेदारी और मानवीय संवेदनाओं से जोड़कर देखा गया है।
*’धरा धाम’ की परिकल्पना को भी मिली जगह*
संत सौरभ की विचारधारा में ‘धरा धाम’ की परिकल्पना को भी पुस्तक में प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है। इसके माध्यम से विभिन्न धर्मों, परंपराओं और संस्कृतियों के बीच संवाद, परस्पर सम्मान और सह-अस्तित्व की भावना को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया है।
कृति में यह विचार सामने रखा गया है कि दुनिया में शांति तभी स्थापित हो सकती है, जब विभिन्न समुदायों और संस्कृतियों के बीच संवाद और सम्मान की भावना मजबूत हो। संत सौरभ की विचारधारा को ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना से जोड़ते हुए मानवता को एक परिवार के रूप में देखने का संदेश दिया गया है।
*किसान परिवार से शुरू हुई जीवन-यात्रा का अंतरराष्ट्रीय उल्लेख*
पुस्तक में संत सौरभ की जीवन-यात्रा का भी विस्तृत चित्रण किया गया है। गोरखपुर के एक किसान परिवार से शुरू हुई उनकी यात्रा को सामाजिक सेवा, आध्यात्मिक चेतना, शांति और विश्व बंधुत्व के संदेश से जुड़ी यात्रा के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
कृति में उनके परिवार और सामाजिक कार्यों में सहयोग देने वाले परिजनों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें उनकी पत्नी डॉ. रागिनी पाण्डेय, पुत्र बाल भक्त शौर्य एवं पिता सामनाथ पाण्डेय सहित परिवार के अन्य सदस्यों के योगदान का उल्लेख किया गया है।
*अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोरखपुर की मानवीय चेतना को पहचान*
‘Sant Saurabh: Voice of Universal Harmony’ के माध्यम से न केवल संत सौरभ के विचारों को अंतरराष्ट्रीय पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है, बल्कि गोरखपुर की सामाजिक, आध्यात्मिक और मानवीय चेतना को भी वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत किया गया है।
कृति के लेखक प्रोफेसर डॉ. इवान गेचिना ने संत सौरभ के जीवन और विचारों को काव्यात्मक शैली में प्रस्तुत करते हुए शांति, करुणा, मानवता, आध्यात्मिक ज्ञान और विश्व बंधुत्व को केंद्र में रखा है। पुस्तक में इस बात पर जोर दिया गया है कि मानवता को जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र और अन्य सामाजिक सीमाओं से ऊपर उठकर एक-दूसरे के प्रति सम्मान और सहयोग की भावना विकसित करनी चाहिए।
संत सौरभ की जीवन-दृष्टि पर आधारित यह कृति साहित्य और सामाजिक चिंतन के बीच एक सेतु के रूप में सामने आई है।
अंतरराष्ट्रीय लेखक द्वारा किसी भारतीय संत के सामाजिक एवं मानवीय विचारों को काव्य के माध्यम से वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया जाना गोरखपुर के लिए भी गौरव का विषय माना जा रहा है।
‘Sant Saurabh: Voice of Universal Harmony’ का मूल संदेश शांति, सेवा, सद्भाव और मानवता को केंद्र में रखते हुए एक ऐसे विश्व की कल्पना करता है, जहां विविधताओं के बावजूद सभी लोग परस्पर सम्मान और भाईचारे के साथ आगे बढ़ें।
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