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जम्मू-कश्मीर की त्रिकूटा पहाड़ियों में स्थित माता वैष्णो देवी का दरबार देश के सबसे पवित्र और कठिन तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है। समुद्र तल से करीब 5 हजार 200 से 5 हजार 300 फीट की ऊंचाई पर स्थित मंदिर तक पहुंचने के लिए बेस कैंप कटरा से लगभग 12 से 13 किलोमीटर की चढ़ाई करनी पड़ती है। हालांकि, यात्रा को आसान बनाने के लिए पहाड़ों को काटकर समतल रास्ता बनाया गया है, जहां चौबीसों घंटे आराम के लिए शेड्स, शाकाहारी भोजन और पानी जैसी सुविधाएं मिलती हैं। श्रद्धालु पैदल यात्रा के अलावा घोड़ा, खच्चर, पिट्ठू, पालकी या फिर कटरा से सांझी छत के बीच हेलीकॉप्टर सेवा का भी उपयोग कर सकते हैं, जहां से केवल 2.5 किलोमीटर की पैदल दूरी बचती है।
वैष्णो देवी की यात्रा पूरे साल खुली रहती है, लेकिन मई-जून और नवरात्रि के दौरान यहां भारी भीड़ रहती है, जबकि जुलाई-अगस्त के मानसूनी महीनों में फिसलन के कारण चढ़ाई कठिन हो जाती है। जम्मू से 50 किलोमीटर दूर स्थित कटरा सड़क और रेल मार्ग से देश के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। साल 2014 में शुरू हुआ श्री माता वैष्णो देवी कटरा रेलवे स्टेशन दिल्ली सहित कई शहरों से सीधी ट्रेनों से जुड़ा है। कटरा और भवन के तापमान में काफी अंतर होने के कारण श्रद्धालुओं को मौसम के अनुसार रेनकोट, छाता या पर्याप्त ऊनी कपड़े और आरामदायक जूते साथ रखने की सलाह दी गई है।
यात्रा शुरू करने के लिए श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा कराया जाने वाला पंजीकरण पूरी तरह अनिवार्य और निशुल्क है। श्रद्धालु कटरा बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और ताराकोट मार्ग पर स्थित केंद्रों से ऑफलाइन या फिर आधिकारिक वेबसाइट से 4 से 60 दिन पहले ऑनलाइन पंजीकरण करा सकते हैं। पंजीकरण के बाद मिलने वाले आरएफआईडी (RFID) यात्रा एक्सेस कार्ड को प्राप्त करने के 6 घंटे के भीतर बाणगंगा स्थित पहली चेक पोस्ट को पार करना अनिवार्य है। बिना RFID कार्ड के पाए जाने पर श्रद्धालुओं को न केवल वापस लौटा दिया जाएगा, बल्कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। इसके अलावा, यात्रियों के ठहरने के लिए कटरा में बजट डोरमेट्री और होटलों की भी व्यवस्था उपलब्ध है।
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