हरदोई में बाढ़ का कहर! हरपालपुर से बिलग्राम तक पानी का तांडव, हजारों की आबादी प्रभावित
गंगा, रामगंगा और गर्रा के बढ़े जलस्तर से बिगड़े हालात बाढ़ के साथ तेज कटान से ग्रामीणों में दहशत
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देखते ही देखते करीब 100 बीघा कृषि भूमि नदी में समाई कई गांवों में नाव बनी आवाजाही का सहारा, राहत-बचाव जारी
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हरदोई में गंगा, रामगंगा और गर्रा नदी के बढ़े जलस्तर से बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। हरपालपुर से बिलग्राम और सांडी तक कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं। निचले इलाकों में पानी पहुंचने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। वहीं बाढ़ के साथ कई इलाकों में हो रहे तेज कटान ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है। हालात ये हैं कि देखते ही देखते कृषि भूमि का बड़ा हिस्सा नदी में समा रहा है और अब ग्रामीणों को गांव की आबादी तक कटान पहुंचने का डर सता रहा है।
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हरपालपुर में कई संपर्क मार्गों पर बाढ़ का पानी भरने और कटान होने से आवागमन प्रभावित हुआ है। चौधरियापुर-कोला समेत कई रास्तों पर पानी भर जाने से ग्रामीणों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। ऊंचागांव, नई दुनिया, दुर्जना, मोल्हनपुर, टिकइया, कनत्थूखेड़ा, अलीगंज ननखेरिया, श्यामपुर और अर्जुनपुर समेत कई गांव बाढ़ से प्रभावित हैं।
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बिलग्राम तहसील के कटरी इलाके में भी गंगा का पानी लगातार परेशानी बढ़ा रहा है। कटरी परसोला, कटरी छिबरामऊ, कटरी जरसेना मऊ, कटरी बिलुही, कटरी महादेवा, कटरी जरेला, पुन्ना पुरवा और मदारी पुरवा के आसपास पानी पहुंच गया है। कई परिवार सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों का रुख कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों को राहत सामग्री और भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
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वहीं सांडी क्षेत्र में गर्रा नदी के उफान से निचले इलाकों और नगर के कुछ हिस्सों में पानी पहुंच गया है। कन्नौज टू-लेन मार्ग पर भी पानी आने से कुछ समय तक आवागमन प्रभावित रहा। कई गांवों में ग्रामीण नाव के सहारे आवाजाही करने को मजबूर हैं। कटरी-कटियारी क्षेत्र में खेत और संपर्क मार्ग जलमग्न हैं, जिससे फसलों को भी भारी नुकसान की आशंका है।
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कटान से दहशत का माहौल बाढ़ के बीच गर्रा नदी के कटान ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है। ग्रामीण नीलकंठ वाजपेई और गोविंद दीक्षित के मुताबिक, जमूरा गांव के पास गर्रा नदी पर पुल बनने के बाद नदी की धारा सीधे राघव गांव की ओर टकरा रही है। तेज बहाव के चलते यहां लगातार कटान हो रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि देखते ही देखते करीब 100 बीघा कृषि भूमि नदी में समा चुकी है।
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ग्रामीणों ने बताया कि कटान की चपेट में दो बगिया भी नदी में समा गईं। इन बगियों में करीब एक दर्जन पेड़ खड़े थे, जो अब नदी की धारा में बह चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर कटान इसी तरह जारी रहा तो आने वाले समय में गांव की आबादी भी इसकी चपेट में आ सकती है। कटान को लेकर ग्रामीणों में दहशत का माहौल है और वे प्रशासन से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
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उधर अलीगंज ननखेरिया क्षेत्र में रामगंगा के टापू पर फंसे गोवंशों को सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान जारी है। नाव के जरिए कई गोवंशों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। पशु चिकित्सा टीम भी प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर पशुओं का उपचार कर रही है और जरूरी दवाएं उपलब्ध करा रही है।
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रिपोर्टों के मुताबिक बाढ़ से 15 हजार से अधिक आबादी प्रभावित हुई है। वहीं बिलग्राम क्षेत्र के 26 गांवों की बिजली आपूर्ति भी सुरक्षा के मद्देनजर बंद की गई है। गंगा, रामगंगा और गर्रा का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में अभी भी खतरा बना हुआ है। गर्रा नदी कई जगह खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
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हालांकि बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी में कमी आने के बाद आने वाले दिनों में कुछ राहत की उम्मीद जताई जा रही है। फिलहाल बाढ़ और कटान प्रभावित इलाकों में प्रशासन की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। राहत और बचाव कार्य जारी है, लेकिन ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी चिंता अब तेज कटान बन गया है, जो उनकी खेती की जमीन के साथ-साथ आबादी के लिए भी खतरा पैदा कर रहा है।
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