16 वर्षों की सेवा देने के बावजूद भविष्य अधर में! आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने CM से लगाई न्याय की गुहार।
बेसिक शिक्षा विभाग के ब्लॉक संसाधन केंद्रों पर वर्ष 2011 से लगातार सेवाएं दे रहे कंप्यूटर ऑपरेटरों और सहायक लेखाकारों के भविष्य को लेकर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, गोरखपुर ने गंभीर चिंता जताई है।
परिषद की महत्वपूर्ण बैठक में 16 वर्षों से आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत कार्य कर रहे कर्मचारियों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई।
परिषद के अध्यक्ष रूपेश श्रीवास्तव ने कहा कि ये कर्मचारी करीब 16 वर्षों से पूरी निष्ठा के साथ विभागीय कार्यों और सरकार की योजनाओं को जमीन पर लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन इतने लंबे कार्यकाल के बाद भी उनका भविष्य सुरक्षित नहीं है। उन्होंने कहा कि “16 वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों के साथ सरकार को न्याय करना चाहिए।”
बैठक में कहा गया कि एक तरफ नियमित कर्मचारियों को वेतन वृद्धि, महंगाई भत्ता, अवकाश, चिकित्सा और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाएं मिलती हैं, वहीं दूसरी तरफ समान प्रकृति का काम करने वाले आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को सीमित मानदेय में परिवार चलाना पड़ रहा है। लगातार बढ़ती महंगाई के बावजूद उनके मानदेय में अपेक्षित वृद्धि नहीं होने से कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट बना हुआ है।
परिषद ने कंप्यूटर ऑपरेटर एवं
लेखाकार वेलफेयर एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि वर्ष 2011 से सेवा दे रहे कर्मचारियों को अनिश्चितता में रखना न्यायसंगत नहीं है।
25 हजार कंप्यूटर ऑपरेटर, 30 हजार हो सहायक लेखाकारों का मानदेय
परिषद ने सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखीं। इनमें वर्ष 2011 से सेवा दे रहे कंप्यूटर ऑपरेटरों एवं सहायक लेखाकारों को विनियमित/स्थायी करने, कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने तथा शासनादेश के अनुरूप श्रेणी-01, 02, 03 एवं 04 के आधार पर मानदेय भुगतान सुनिश्चित करने की मांग शामिल है।
इसके अलावा कर्मचारियों को वरिष्ठता का लाभ देने, महिला कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश तथा सभी कर्मचारियों को चिकित्सा एवं अन्य आवश्यक अवकाश की सुविधा देने की मांग की गई।
महंगाई को देखते हुए परिषद ने कंप्यूटर ऑपरेटरों का मानदेय ₹25,000 और सहायक लेखाकारों का ₹30,000 प्रतिमाह किए जाने की मांग उठाई।
मौत पर 25 लाख का बीमा और आश्रित को नौकरी की मांग
परिषद ने कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में ₹25 लाख का मृत्यु बीमा तथा आश्रित को सेवा में लिए जाने की व्यवस्था करने की मांग भी की। इसके साथ ही कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भविष्य निधि सहित अन्य सामाजिक सुरक्षा का लाभ देने की मांग रखी गई।
परिषद पदाधिकारियों ने कहा कि जो कर्मचारी 16 वर्षों तक सरकारी योजनाओं और विभागीय व्यवस्था को मजबूती देने में जुटे रहे, उनके अपने भविष्य की कोई स्पष्ट गारंटी न होना गंभीर चिंता का विषय है। यह सिर्फ वेतन बढ़ाने की मांग नहीं, बल्कि हजारों कर्मचारियों और उनके परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और भविष्य का सवाल है।
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