महंत की गद्दी को लेकर फिर गरमाया विवाद!
विवादित जमीन पर कब्जे के आरोपों के बीच पुराने गद्दी विवाद की चर्चा तेज, महिला ने धमकी देने का लगाया आरोप
स्थानीय लोगों का दावा—महंत रामजीवन दास की गद्दी से जुड़ा है पुराना विवाद, कागजात होने की भी कही जा रही बात
जालौन। कस्बा जालौन के मोहल्ला चौधरयाना स्थित मंदिर और उससे जुड़ी भूमि को लेकर विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। एक ओर जहां मजदूर पेशा महिला राममूर्ति पत्नी रामकिशुन ने विवादित भूमि पर तार फेंसिंग एवं जाली लगाकर कथित रूप से कब्जे की कोशिश किए जाने का आरोप लगाया है, वहीं दूसरी ओर इस पूरे प्रकरण के पीछे मंदिर की महंती और गद्दी को लेकर चला आ रहा पुराना विवाद भी चर्चा में है।
महंत रामजीवन दास की गद्दी को लेकर पुराना विवाद होने का दावा
मोहल्ले के कुछ लोगों और मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार, महंत रामजीवन दास की गद्दी से जुड़ी पुरानी परंपरा और उत्तराधिकार को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है। स्थानीय लोगों का दावा है कि इस गद्दी के दो प्रमुख शिष्य ओमप्रकाश महंत/दास और रामसिया दास बताए जाते हैं।
कुछ स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों पहले ओमप्रकाश दास द्वारा अपने भाई भानुप्रकाश बादल को बुलाए जाने के बाद रामसिया दास को मंदिर से हटना पड़ा था। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के संबंध में स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि इस खबर के लिए उपलब्ध नहीं हो सकी है।
सुप्रीम कोर्ट तक मामला जाने का भी दावा
मंदिर से जुड़े लोगों का दावा है कि महंती और गद्दी को लेकर विवाद न्यायालयों तक पहुंचा और मामला सुप्रीम कोर्ट तक चला, जहां रामसिया दास को महंत घोषित किए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि इस दावे के समर्थन में संबंधित न्यायालय के आदेश की प्रमाणित प्रति फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होने के कारण इसे स्थानीय लोगों का दावा ही माना जा रहा है।
भानुप्रकाश बादल और शिवम बादल पर भी आरोप
इसी पुराने विवाद को वर्तमान भूमि विवाद से जोड़ते हुए कुछ मोहल्लेवासियों का आरोप है कि भानुप्रकाश बादल और उनके पुत्र शिवम बादल मंदिर एवं उससे जुड़ी जमीन पर अपना प्रभाव बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। कुछ लोगों ने भानुप्रकाश बादल के व्यवहार को दबंग प्रवृत्ति का बताते हुए भी आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
महिला की गुहार—“हमें धमकाया जा रहा है”
वर्तमान विवाद में राममूर्ति पत्नी रामकिशुन ने पुलिस को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि उनकी पुश्तैनी विवादित भूमि के 859 जुजभाग मकान पर भानुप्रकाश बादल एवं शिवम बादल समेत अन्य लोगों द्वारा तार फेंसिंग और जाली लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
महिला का कहना है कि संबंधित भूमि को लेकर न्यायालय में मामला विचाराधीन है और वहां स्टे प्रभावी है। प्रार्थिनी ने आरोप लगाया कि उसे कथित रूप से धमकाया जा रहा है और यदि जमीन की स्थिति में जबरन बदलाव किया गया तो उसे अपूरणीय क्षति हो सकती है।
“कागजात होने” का भी दावा
मंदिर से जुड़े कुछ लोगों का दावा है कि महंती और मंदिर की संपत्ति से संबंधित कागजात उनके पास मौजूद हैं और आवश्यकता पड़ने पर इन्हें प्रशासन एवं न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है। हालांकि इन दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच एवं सत्यापन होना अभी बाकी है।
महिला सशक्तिकरण के दौर में उठे सवाल
प्रदेश सरकार द्वारा महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण पर लगातार जोर दिया जा रहा है। ऐसे में यदि एक महिला अपनी संपत्ति को लेकर धमकी अथवा दबाव की शिकायत कर रही है तो प्रशासन के सामने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की चुनौती है। सवाल यह भी है कि न्यायालय में विवाद लंबित होने के बावजूद विवादित भूमि पर फेंसिंग लगाने की स्थिति क्यों पैदा हुई?
अब देखना यह होगा कि पुलिस और प्रशासन इस पूरे मामले में दोनों पक्षों के दस्तावेजों एवं न्यायालय के आदेशों की जांच कर क्या कार्रवाई करता है।
स्पष्टिकरण: खबर में मंदिर की महंती, पुराने विवाद, न्यायालयी निर्णय, दबंगई, धमकी तथा जमीन पर कब्जे से संबंधित बातें संबंधित पक्षों, स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ता द्वारा किए गए दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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