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अलवर जिले की लक्ष्मणगढ़ तहसील में स्थित तिलकपुर धाम में चल रही भागवत कथा के दौरान, गाँव के कुछ ‘जातकवादी’ किस्म के युवाओं ने शराब के नशे में श्रद्धालुओं पर हमला कर दिया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। यह घटना दलित समुदाय के एक धार्मिक स्थल पर हुई है, जिसने इलाके में खौफ़ का माहौल पैदा कर दिया है।
तिलकपुर धाम गाँव के अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों द्वारा निर्मित एक धार्मिक स्थल है, जहाँ वर्षों से महाराज हरिश्चंद्र दास की पूजा होती आ रही है। इस मंदिर परिसर का संचालन और इसकी सभी गतिविधियाँ गाँव के अनुसूचित जाति वर्ग के लोग ही संभालते हैं। पीड़ित परिवारों ने बताया है कि मंदिर की भूमि भी गाँव के अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों ने ही दान की है।
गाँव के ही गुर्जर समाज के कुछ लोग लगातार इस मंदिर को ‘सार्वजनिक’ करने और उसकी गद्दी पर अपना आधिपत्य स्थापित करने का प्रयास करते रहे हैं। यह विरोध इसलिए है क्योंकि मंदिर का निर्माण और उसकी साज-सज्जा अनुसूचित जाति वर्ग के लोग ही वर्षों से करते आ रहे हैं। गाँव के लोग जोर देकर कहते हैं कि यह ज़मीन उन्हीं के पूर्वजों ने दी थी, उन्हीं के महाराज की पूजा होती है, और यह उनका धार्मिक तथा मान-सम्मान का स्थल है।
यह हमला 24 जून को हुआ था, लेकिन अभी तक पुलिस ने हमलावरों को गिरफ्तार नहीं किया है। पीड़ित परिवार लगातार पुलिस प्रशासन और राजनेताओं के पास अपनी गुहार लेकर जा रहे हैं, परंतु उन्हें अभी तक कोई आश्वासन या पुलिस कार्रवाई होती नज़र नहीं आ रही है। आरोप है कि पुलिस राजनीतिक दबाव के आगे नतमस्तक हो गई है, जिसके कारण न्याय नहीं मिल पा रहा है।
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