15 सूत्रीय मांगों को लेकर सफाई मित्रों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, चरमराई शहर की सफाई व्यवस्था
बनखेड़ी नगर से रोजाना निकलता है 15-20 ट्रॉली कचरा
बनखेड़ी। नगर परिषद बनखेड़ी में कार्यरत सफाई मित्र अपनी 15 सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर मंगलवार दोपहर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। बुधवार को सफाई मित्र नगर परिषद कार्यालय के समीप धरने पर बैठे रहे। हड़ताल के चलते शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित होने लगी है।
सफाई मित्रों ने बताया कि आमरण अनशन पर बैठे रविशंकर वाल्मीकि, अजाक्स जिलाध्यक्ष के समर्थन में स्थानीय शाखा पिपरिया के कर्मचारी 8 सितंबर से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इसी के समर्थन में बनखेड़ी के सफाई मित्रों ने सीएमओ निशांत श्रीवास्तव, थाना प्रभारी विजय कुमार सनस एवं तहसीलदार मनोज नागवंशी को सामूहिक रूप से लिखित सूचना दी है।
*दैनिक वेतनभोगियों को नियमित करने की मांग-*
सफाई मित्र राजू खरे और चिरोंजी लाल विशोपीया ने बताया कि लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की गई है। राजू खरे ने बताया कि दैनिक वेतनभोगियों को नियमित करने के लिए शासन स्तर से कई बार जानकारी मांगी गई, लेकिन अब तक नियमितीकरण नहीं हुआ है। बनखेड़ी नगर परिषद में करीब 60 सफाई मित्र कार्यरत हैं, जिनमें 25 दैनिक वेतनभोगी हैं। इसके अलावा 14 मानदेय कर्मियों को कलेक्टर दर के अनुसार वेतन नहीं मिल रहा है। सफाई मित्रों ने इन सहित 15 सूत्रीय मांगों के निराकरण की मांग की है।
*हड़ताल खत्म होते ही शुरू होगी सफाई-*
नगर परिषद के स्वच्छता निरीक्षक मदन मोहन चौकसे ने बताया कि सफाई मित्रों ने रविशंकर वाल्मीकि के समर्थन में हड़ताल की सूचना दी है। हड़ताल समाप्त होने के बाद शहर की सफाई व्यवस्था पूर्व की तरह नियमित रूप से शुरू करा दी जाएगी।
*रोज निकलता है 15 से 20 ट्रॉली कचरा-*
बनखेड़ी बाजार सहित नगर के विभिन्न वार्डों से प्रतिदिन करीब 15 से 20 मैजिक-ट्रॉली कचरा निकलता है।
ऐसे में यदि सफाई मित्रों की हड़ताल लंबी खिंची तो शहर में जगह-जगह कचरा जमा होने की स्थिति बन सकती है। नागरिकों का कहना है कि हड़ताल के दौरान जनप्रतिनिधियों और नगर परिषद को स्वच्छता के प्रति जागरूकता अभियान चलाकर नागरिकों से कचरा निर्धारित स्थान पर डालने की अपील करनी चाहिए, ताकि शहर की स्वच्छता व्यवस्था को पूरी तरह बिगड़ने से बचाया जा सके।
अपना राज्य चुनें
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
बिहार
छत्तीसगढ़
दिल्ली
हरियाणा
हिमाचल प्रदेश
जम्मू और कश्मीर
झारखंड
मध्य प्रदेश
राजस्थान
उत्तर प्रदेश
उत्तराखंड