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देशभर में लगभग 152 प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में धांधली, बढ़ती बेरोजगारी और जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में अंबाला छावनी में ‘युवा एकजुटता मार्च’ का आयोजन किया गया। चित्रा सरवारा के जन-निवेदन पर आयोजित इस सामाजिक, सर्वपार्टी और सर्वजन मार्च में भारी संख्या में नागरिक शामिल हुए। ‘अंबाला युवा के साथ’ के बैनर, हाथों में तिरंगा व मोमबत्तियाँ और देशभक्ति के गीतों के साथ यह मार्च अंबाला रेलवे रोड पार्किंग से शुरू होकर सदर बाज़ार होते हुए पुरानी अनाज मंडी पहुंचा। वहां ‘रघुपति राघव राजा राम’ भजन के साथ साझा प्रार्थना की गई और राष्ट्रगान के साथ यात्रा का समापन हुआ। इस दौरान छात्र-छात्राओं, महिलाओं, युवाओं, किसानों, मजदूरों, कर्मचारियों, व्यापारियों और स्थानीय पार्षदों व सरपंचों ने लोकतांत्रिक अधिकारों और निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था के समर्थन में आवाज़ बुलंद की।
मार्च को संबोधित करते हुए चित्रा सरवारा ने कहा कि ‘युवा एकजुटता मार्च’ शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि युवाओं, संविधान और नैतिकता के पक्ष में समर्थन प्रदर्शन है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और धांधली ने लाखों युवाओं की मेहनत और भरोसे को गहरी चोट पहुंचाई है। जंतर-मंतर पर शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर दुख व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति को बल प्रयोग के बजाय संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया से संबोधित किया जाना चाहिए। उन्होंने किसान आंदोलन, महिला खिलाड़ियों और सरपंचों के आंदोलनों का उदाहरण देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण जन आंदोलनों की बात को गंभीरता से सुनना लोकतांत्रिक सरकार की जिम्मेदारी होती है।
चित्रा सरवारा ने किसी दल विशेष के समर्थन या विरोध से ऊपर उठकर करोड़ों युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए संगठित होने का आह्वान किया। उन्होंने मांग की कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो और ऐसी व्यवस्था बने जहां मेहनत और योग्यता ही सफलता का आधार हो। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित लोगों ने युवाओं के अधिकारों, शिक्षा, रोजगार और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए इस शांतिपूर्ण जनजागरण अभियान को आगे भी जारी रखने का संकल्प लिया।
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