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अंबाला के धीन गांव में शनिवार सुबह उस समय भारी विरोध की स्थिति पैदा हो गई, जब राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की एक जेसीबी मशीन ने स्थानीय तालाब पर ग्राम पंचायत द्वारा बनाई जा रही सुरक्षा पटरी को अचानक ढहाना शुरू कर दिया। यह निर्माण कार्य आगामी मानसून के दौरान जलभराव और बरसाती पानी की सही निकासी के लिए कराया जा रहा था। इस तोड़फोड़ की खबर फैलते ही गांव के सरपंच, पंच और बड़ी संख्या में ग्रामीण तुरंत मौके पर इकट्ठा हो गए और उन्होंने काम को रुकवा दिया।
ग्रामीणों द्वारा पूछताछ किए जाने पर जेसीबी चालक ने बताया कि उसे एनएचएआई की तरफ से भेजा गया था। इस पर पंचायत और ग्रामीणों ने तीखा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि विभाग ने इस कार्रवाई से पहले पंचायत को कोई लिखित या मौखिक सूचना नहीं दी। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यह जमीन ग्राम पंचायत के अधिकार क्षेत्र में आती है, इसलिए हाईवे अथॉरिटी द्वारा तालाब की पटरी को नुकसान पहुंचाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं बनता। स्थिति को देखते हुए डायल-112 पुलिस को मौके पर बुलाया गया, वहीं ग्रामीणों ने एनएचएआई प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।
विवाद बढ़ता देख, करीब तीन घंटे बाद एनएचएआई के असिस्टेंट हाईवे इंजीनियर वरुण कुमार मौके पर पहुंचे। धीन सरपंच ने उनके सामने जमीन और चल रहे निर्माण कार्य से जुड़े सभी पुख्ता दस्तावेज पेश किए, जिसके बाद अधिकारियों ने मामले की जांच के लिए सोमवार तक का समय मांगा है। इस बीच, पंचायत ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि तालाब की सफाई और पटरी का निर्माण कार्य रुकने वाला नहीं है, क्योंकि जमीन पंचायत की है और कार्य नियमानुसार किया जा रहा है। धीन सरपंच सतविन्द्र सिंह सहित पंच राजपाल, कमलजीत सिंह, जसबीर कौर, संजीव कुमार, राजकुमार, लक्ष्मी देवी, रेणु बाला, सतविन्द्र कौर, करम चंद, बलविन्द्र, सुमन लता, प्रिंस सैनीं, अनिल सैनीॆ, सुखविंदर कौर, सरोज बाला, मनजीत कौर, तरसेम, राजू व अन्य ने बताया कि पिछले करीब एक साल से उन्हें ऑनलाइन शिकायतें मिल रही थीं कि बरसात के मौसम में तालाब ओवरफ्लो होकर नेशनल हाईवे 344 की सर्विस लेन पर आ जाता है। इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार और पंचायती विभाग के नियमों के तहत सर्विस लेन से सटे तालाब की सफाई व पटरी बनाने का काम शुरू किया गया था, ताकि हाईवे और गांव दोनों को जलभराव से बचाया जा सके।
सरपंच का कहना है कि एनएचएआई के आला अधिकारियों को इस पूरे प्रोजेक्ट की पहले से जानकारी है और उन्हें सारे कागजात भी दिए जा चुके हैं, फिर भी शनिवार सुबह बिना किसी पूर्व सूचना के जेसीबी भेजना विभाग की मनमानी को दर्शाता है। ग्रामीणों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए यह भी आरोप लगाया कि हाईवे अथॉरिटी को तालाब की पटरी तोड़ने की तो जल्दी है, लेकिन बीते कई सालों से हाईवे पर बंद पड़ी लाइटों को ठीक करने, सर्विस लेन पर बिखरी बजरी को हटाने और वहां की साफ-सफाई पर विभाग का कोई ध्यान नहीं है।
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