शुरू न्यूज़
ग्वालियर में आम जनता और सामाजिक कार्यकर्ता VIP कल्चर, हूटर-बत्ती के दुरुपयोग और नेताओं के कारण लगने वाले ट्रैफिक जाम के खिलाफ मुखर हो गए हैं, जो नागरिकों के अधिकारों के प्रति उनकी सजगता को दर्शाता है। लोकतंत्र में नेताओं या अधिकारियों को विशेष प्राथमिकता देते हुए आम जनता के कार्यों और दैनिक यातायात को बाधित करना पूरी तरह से गलत बताया गया है।
भारत सरकार के नियमों के अनुसार, निजी या अनधिकृत वाहनों पर बत्ती और हूटर लगाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। इसके साथ ही, किसी भी वीआईपी मूवमेंट के नाम पर आम जनता को घंटों तक ट्रैफिक में रोकना नागरिकों के मौलिक अधिकार (आवागमन की स्वतंत्रता का अधिकार) का सीधा उल्लंघन माना जाता है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन की यह जिम्मेदारी है कि वे वीआईपी व्यवस्था के दौरान भी आम जनता के लिए सुचारू ट्रैफिक और वैकल्पिक मार्गों का इंतजाम करें।
इस समस्या से लगातार परेशान लोग अब शांतिपूर्ण और कानूनी तरीकों से अपनी बात उठा सकते हैं। इसमें सोशल मीडिया पर विरोध प्रदर्शन या ट्रैफिक जाम के वीडियो/तस्वीरें साझा कर ग्वालियर पुलिस और मध्य प्रदेश पुलिस के आधिकारिक हैंडल्स को टैग करके शिकायत दर्ज कराना शामिल है। इसके अतिरिक्त, मध्य प्रदेश सरकार के सीएम हेल्पलाइन पोर्टल या टोल-फ्री नंबर 181 पर कॉल करके वीआईपी कल्चर के कारण हो रही ट्रैफिक जाम और अव्यवस्था की आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। नागरिक स्थानीय ट्रैफिक पुलिस अधीक्षक (SP Traffic) या जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर यह भी मांग कर सकते हैं कि नेताओं के दौरों या कार्यक्रमों के समय आम जनता के लिए रूट डायवर्जन प्लान पहले से सार्वजनिक किया जाए। नागरिकों का यह विरोध प्रशासन को अपनी कार्यशैली सुधारने और जनता के प्रति अधिक जवाबदेह बनने के लिए मजबूर करेगा।
अपना राज्य चुनें
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
बिहार
छत्तीसगढ़
दिल्ली
हरियाणा
हिमाचल प्रदेश
झारखंड
मध्य प्रदेश
राजस्थान
उत्तर प्रदेश
उत्तराखंड