जे. बी. सिंह
गोरखपुर
राप्ती हादसा
क्या दिवंगत अधिवक्ताओं के परिवार से मिलेंगे CM योगी? परिजनों को मुख्यमंत्री से संवेदना की उम्मीद
अधिवक्ताओं की मौत से परिवार सदमे में,
सदर विधायक योगी आदित्यनाथ से परिजनों को संवेदना की उम्मीद
दो अधिवक्ताओं की मौत पर उठे कई सवाल
राप्ती घाट हादसे में दो अधिवक्ताओं की मौत, अब बिजली गिरी थी या निर्माण में खामी थी? जांच में सामने आएंगे कई सवाल
वैज्ञानिक रिपोर्ट से खुलेगा हादसे का राज, निर्माण फर्म और इंजीनियरों पर FIR; इलाज और एंबुलेंस में देरी की भी जांच
एंकर:- गोरखपुर में राप्ती नदी के किनारे गुरु गोरक्षनाथ घाट पर गुंबदनुमा छज्जा गिरने से दो अधिवक्ताओं की मौत के बाद उनके परिवारों में मातम है। दोनों अधिवक्ता साथी अधिवक्ता विनोद तिवारी की माता की अंत्येष्टि में शामिल होने घाट पहुंचे थे। इसी दौरान बारिश शुरू होने पर दोनों गुंबदनुमा छज्जे के नीचे बैठ गए और अचानक छज्जा भरभराकर गिर गया। हादसे में अधिवक्ता आलोक अस्थाना और संजय सिंह गंभीर रूप से घायल हुए, बाद में इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई।
हादसे के तत्काल बाद प्रत्यक्षदर्शियों ने आकाशीय बिजली गिरने की बात कही थी। इसी आधार पर प्रशासन ने प्रथम दृष्टया इसे बिजली गिरने से हुआ हादसा माना और दोनों परिवारों को आपदा विभाग की ओर से चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई। लेकिन बाद में निर्माण की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठने लगे।
अब वैज्ञानिक रिपोर्ट से खुलेगा राज
प्रशासन अब यह स्पष्ट कराने की तैयारी में है कि हादसे के समय वास्तव में वहां आकाशीय बिजली गिरी थी या नहीं। इसके लिए राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र यानी एनआरएससी/इसरो अथवा भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान, पुणे से वैज्ञानिक रिपोर्ट मंगाने की प्रक्रिया चल रही है।
आकाशीय बिजली का पता लगाने वाले सेंसर उसके दौरान पैदा होने वाले रेडियो सिग्नल को रिकॉर्ड करते हैं। अलग-अलग सेंसर से मिले संकेतों के समय और स्थान का मिलान कर बिजली गिरने की संभावित लोकेशन का पता लगाया जा सकता है।
हादसे वाली जगह से करीब 12 मीटर की दूरी पर मौजूद पेड़ के सुरक्षित रहने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि प्रशासन का कहना है कि केवल पेड़ के सुरक्षित रहने से बिजली गिरने या न गिरने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। अंतिम स्थिति वैज्ञानिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
निर्माण की गुणवत्ता भी जांच के घेरे में
हादसे के बाद करीब पांच वर्ष पहले घाट का सुंदरीकरण कराने वाली फर्म मेसर्स अनीता सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता और अवर अभियंता के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पुलिस निर्माण की गुणवत्ता और संभावित लापरवाही समेत पूरे मामले की जांच कर रही है। जिलाधिकारी दीपक मीणा के मुताबिक हादसे के सभी पहलुओं की उच्चस्तरीय जांच की जा रही है।
इलाज और एंबुलेंस में देरी पर भी जांच
हादसे के बाद घायल दोनों अधिवक्ताओं को जिला अस्पताल ले जाया गया था। वहां इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए गए। मेडिकल कॉलेज रेफर किए जाने के बाद एंबुलेंस उपलब्ध न होने को लेकर भी अधिवक्ताओं ने हंगामा किया था। काफी देर बाद एंबुलेंस पहुंचने का आरोप है।
इस मामले में सीएमओ के खिलाफ भी FIR दर्ज कराई गई है। अब शासन स्तर से इलाज में कथित लापरवाही और एंबुलेंस पहुंचने में देरी की जांच शुरू की जा रही है। स्थानीय स्तर पर डीएम ने तीन सदस्यीय समिति गठित की है, जिसे सात दिन में रिपोर्ट देनी है।
परिवार को अब सरकार से उम्मीद
दो अधिवक्ताओं की मौत के बाद उनके परिवार गहरे सदमे में हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता संजय सिंह की दो बेटियां हैं। परिवार के लोग अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में जुटे हैं और उन्हें उम्मीद है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जो गोरखपुर से विधायक भी हैं, परिवार से मिलकर उनकी पीड़ा साझा करेंगे।
वहीं, कांग्रेस जिला अध्यक्ष की ओर से दोनों दिवंगत अधिवक्ताओं को श्रद्धांजलि देते हुए गांधी प्रतिमा पर कैंडल मार्च निकाला गया। सरकार से अधिवक्ताओं के आश्रितों को सरकारी नौकरी और एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग भी की गई है।
अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि राप्ती घाट पर वह गुंबद आखिर क्यों गिरा—सवाल यह भी है कि क्या हादसा केवल प्राकृतिक आपदा था, या इसके पीछे निर्माण और व्यवस्था से जुड़ी कोई लापरवाही भी थी? वैज्ञानिक और प्रशासनिक जांच की रिपोर्ट इन सवालों का जवाब देगी।
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