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धूनीवाले दादाजी, जिन्हें साईं खेड़ा वाले दादाजी (केशवानंदजी महाराज) के रूप में जाना जाता है, मध्य प्रदेश के एक महान अवधूत संत थे। वे भगवान शिव के अवतार माने जाते हैं और साईं खेड़ा में एक वृक्ष के नीचे प्रकट हुए थे। अपने जीवन में उन्होंने चने को सोना बनाने जैसी अद्भुत लीलाएं और चमत्कार किए। दादाजी ने निरंतर धूनी जलाकर ध्यान किया, जो अब खंडवा के ‘दादा दरबार’ में भी प्रज्वलित है। अंततः, वे 1930 में महासमाधि में चले गए, और उनके प्रति श्रद्धा आज भी लाखों भक्तों के मन में है।
धूनीवाले दादाजी, जिन्हें साईं खेड़ा वाले दादाजी (केशवानंदजी महाराज) के रूप में जाना जाता है, मध्य प्रदेश के एक महान अवधूत संत थे। वे भगवान शिव के अवतार माने जाते हैं और साईं खेड़ा में एक वृक्ष के नीचे प्रकट हुए थे। अपने जीवन में उन्होंने चने को सोना बनाने जैसी अद्भुत लीलाएं और चमत्कार किए। दादाजी ने निरंतर धूनी जलाकर ध्यान किया, जो अब खंडवा के ‘दादा दरबार’ में भी प्रज्वलित है। अंततः, वे 1930 में महासमाधि में चले गए, और उनके प्रति श्रद्धा आज भी लाखों भक्तों के मन में है।
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