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परम आदरणीय अति सम्मानित भारत जैसे विशाल देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी हैं। जो भारत देश को विश्व गुरु बनाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं हमारी कामना है फिर 2029 में प्रधानमंत्री पद सुशोभित करेंगे।
भारत के प्रधानमंत्री (श्री नरेंद्र मोदी) के लिए राजनीतिक मंचों और समर्थकों द्वारा ‘तेजस्वी’ (या प्रायः ‘यशस्वी और तेजस्वी’) विशेषण का प्रयोग उनके प्रभावशाली नेतृत्व, तेज-तर्रार भाषण शैली और ऊर्जावान कार्यशैली को दर्शाने के लिए किया जाता है। [1, 2]
सम्मान और विशेषण के कारण
ऊर्जावान नेतृत्व: उनकी कार्यशैली में देश और दुनिया के स्तर पर दिखने वाली सक्रियता और दृढ़ता।
प्रभावी संवाद शैली: जनता को सीधे जोड़ने और प्रेरित करने की उनकी भाषण कला।
सफलता और यश: राजनीतिक व प्रशासनिक मोर्चों पर मिलने वाली सफलताओं को सम्मान देने के लिए समर्थक इस प्रकार के विशेषणों का उपयोग करते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने आर्थिक और बुनियादी ढांचे के मामले में महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में चुनौतियाँ भी बनी हुई हैं। इस कार्यकाल की सफलता और कमियों का आकलन अलग-अलग दृष्टिकोणों से किया जाता है। [1, 2, 3]
विकास और सकारात्मक पक्ष (Progress)
बुनियादी ढांचा (Infrastructure): एक्सप्रेसवे, राजमार्गों (प्रतिदिन औसतन 36 किमी सड़क निर्माण), रेलवे और हवाई अड्डों के निर्माण में तेजी आई है। [1, 2]
डिजिटलीकरण (Digitalization): UPI और डिजिटल इंडिया ने वित्तीय लेन-देन और सरकारी सेवाओं को आम आदमी तक आसान बनाया है। [1, 2]
वैश्विक स्थिति (Global Standing): भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है और वैश्विक मंचों पर देश का प्रभाव बढ़ा है। [1, 2, 3]
कल्याणकारी योजनाएं (Welfare Schemes): आवास, मुफ्त राशन, शौचालय और स्वच्छ रसोई गैस (LPG) जैसी योजनाओं का लाभ करोड़ों लोगों तक सीधे पहुँचा है। [1, 2]
चुनौतियाँ और आलोचनात्मक पक्ष (Challenges)
बेरोजगारी और रोजगार (Employment): युवाओं के लिए पर्याप्त संख्या में बेहतर और स्थायी नौकरियों का सृजन एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। [1, 2]
आर्थिक असमानता (Inequality): देश में अमीर और गरीब के बीच की खाई बढ़ी है तथा धन का संकेंद्रण कुछ ही हाथों में होने के आरोप लगते रहे हैं। [1, 2]
विनिर्माण (Manufacturing): ‘मेक इन इंडिया’ के बावजूद कुल जीडीपी में विनिर्माण (manufacturing) का हिस्सा उम्मीद के मुताबिक तेजी से नहीं बढ़ पाया है।
कांग्रेस के लंबे शासनकाल में देश की स्थिति मिश्रित रही, जिसमें बुनियादी ढांचे और शिक्षा का विकास हुआ, लेकिन गरीबी, भ्रष्टाचार और राजनीतिक उथल-पुथल जैसी चुनौतियाँ भी रहीं।मुख्य उपलब्धियाँ और विकाससंस्थाओं की स्थापना: देश में आईआईटी (IIT), एम्स (AIIMS) और आईआईएम (IIM) जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों की नींव रखी गई।कृषि और उद्योग: हरित क्रांति के जरिए देश को खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाया गया और भारी उद्योगों की स्थापना हुई।विज्ञान और अंतरिक्ष: इसरो (ISRO) और परमाणु ऊर्जा कार्यक्रमों की शुरुआत हुई, जिससे तकनीकी क्षेत्र में प्रगति हुई।प्रमुख चुनौतियाँ और समस्याएंआर्थिक संकट: 1991 से पहले देश में कई बार आर्थिक और विदेशी मुद्रा भंडार का गंभीर संकट देखा गया।आपातकाल: वर्ष 1975 से 1977 के दौरान देश में आपातकाल (Emergency) लगा, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों पर असर पड़ा।आंतरिक अशांति: आतंकवाद, भाषाई और क्षेत्रीय विवाद तथा कई राज्यों में अलगाववादी आंदोलनों का सामना करना पड़ा।
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