झारखंड में कोयला चोरी पर रोक लगायेंगे l मान्निये श्री अमित साह जी झारखंड में कोयले की चोरी मुख्य रूप से संगठित माफियाओं, अवैध खनन, और सुरक्षा तंत्र में मिलीभगत के जरिए की जा रही है।
कोयला चोरी के मुख्य तरीके और कारण
अवैध खनन और रैट-होल माइनिंग: खदानों में अवैध तरीके से छोटे व संकरे गड्ढे (रैट-होल) बनाकर या खुली खदानों (ओपन-कास्ट माइंस) से रात के समय अवैध रूप से कोयला निकाला जाता है। [1]
वाहनों के जरिए अवैध परिवहन: ट्रकों, हाइवा (बड़े डंपर), ट्रैक्टरों, और यहां तक कि साइकिलों के जरिए भी चोरी किए गए कोयले को एक जगह से दूसरी जगह चुपचाप पहुंचाया जाता है। [1, 2, 3]
संगठित सिंडिकेट और मिलीभगत: स्थानीय स्तर पर अपराधियों और कोयला माफियाओं का एक नेटवर्क काम करता है, जो फर्जी चालान या दस्तावेजों के सहारे अवैध कोयले को वैध दिखाने की कोशिश करता है। [1, 2]
परित्यक्त (बंद) खदानें: ऐसी खदानें जहां काम बंद हो चुका है, वहां सुरक्षा न होने का फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन किया जाता है। [1, 2]
सरकार और प्रशासन के कदम
इस चोरी को रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने ‘जीरो कोल लीकेज’ (Zero Coal Leakage) अभियान चलाया है। इसके तहत केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को खदानों की सुरक्षा और MMDR Act के तहत जब्ती व तलाशी के विशेष अधिकार दिए गए हैं। साथ ही, ड्रोन से निगरानी और कमांड सेंटर्स के जरिए चौकसी बढ़ाई गई है। [1, 2, 3, 4]
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