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मोदी के नेतृत्व को 140 करोड़ देशवासियों के सपनों की हुंकार और सोए हुए भारत को जगाने वाली चिंगारी करार देते हुए कहा गया है कि जब नेतृत्व मजबूत होता है तो देश अजेय बन जाता है। यह ऐसा संकल्प और विश्वास है जो हर दिल में आत्मबल जगाता है, संकट में सीना तानकर खड़ा रहता है और विश्व मंच पर भारत की पहचान बनता है।
राष्ट्रहित को सर्वोपरि बताते हुए यह संदेश दिया गया है कि लोकतंत्र में विरोध करने का अधिकार सभी को है, लेकिन आम जनता के जीवन को बाधित करने, हिंसा फैलाने या देश के विकास में रुकावट उत्पन्न करने वाला कोई भी प्रदर्शन स्वीकार्य नहीं हो सकता। उग्र विरोध के बजाय संवाद, लोकतांत्रिक मूल्यों और रचनात्मक समाधानों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है ताकि देश में शांति, प्रगति और सामाजिक सौहार्द बना रहे।
देश के युवाओं और कर्णधारों से जागने का आह्वान करते हुए भ्रष्ट नीतियों को स्वीकार न करने और जन-आंदोलन की ज्वाला जलाने की बात कही गई है। साथ ही लोकतंत्र का सम्मान करने, कानून का पालन करने और राष्ट्रहित को सबसे ऊपर रखने का संकल्प लिया गया है। संदेश में जोर दिया गया है कि एक मजबूत लोकतंत्र वही है जहाँ मतभेद तो हों, लेकिन मनभेद बिल्कुल न हों।
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