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जालौन तहसील में उपजिलाधिकारी (SDM) रिंकू सिंह राही के तबादले के बाद उनकी वापसी की माँग को लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। उनकी सख्त कार्यशैली, पारदर्शी प्रशासन और जनहित में लिए गए फैसलों के कारण क्षेत्र में वे काफी चर्चित थे। बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और व्यापारियों ने उनकी वापसी की माँग करते हुए प्रदर्शन किया और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर उन्हें तत्काल प्रभाव से जालौन तहसील में फिर से तैनात करने की गुहार लगाई। इस दौरान जालौन ‘ईमानदार SDM वापस लाओ’ के नारों से गूँज उठा।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि श्री राही के कार्यकाल में तहसील क्षेत्र में अवैध खनन, सरकारी भूमि पर अतिक्रमण और अन्य अवैध गतिविधियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाए गए। उनके नेतृत्व में प्रशासन ने कई स्थानों पर कार्रवाई करते हुए सरकारी संपत्तियों को अतिक्रमण से मुक्त कराया और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए, जिससे कानून-व्यवस्था मजबूत हुई और आम जनता में प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ा।
नागरिकों का आरोप है कि श्री राही के स्थानांतरण के बाद क्षेत्र में अवैध खनन और अतिक्रमण करने वाले तत्व फिर से सक्रिय होने लगे हैं, और जिन गतिविधियों पर पहले प्रभावी नियंत्रण था, वे दोबारा बढ़ती दिखाई दे रही हैं, जिससे प्रशासनिक सख्ती पर सवाल उठने लगे हैं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्यवाही नहीं की गई तो इसका असर पर्यावरण, सरकारी राजस्व और आम लोगों के हितों पर पड़ सकता है। उन्होंने जालौन जैसे संवेदनशील क्षेत्र के लिए एक निष्पक्ष, ईमानदार और दबाव से मुक्त अधिकारी की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया कि वे जनता की भावनाओं को शासन तक पहुँचाकर रिंकू सिंह राही की पुनः जालौन में तैनाती के लिए आवश्यक पहल करें। इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज़ हो गई है, और क्षेत्रवासियों की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शासन और प्रशासन जनता की इस माँग पर गंभीरता से विचार करेगा या यह विरोध केवल ज्ञापन तक ही सीमित रह जाएगा।
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