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खिमलासा के पास ग्राम गाड़ौली में जवाहर पुल के निकट हिंदू संगठनों और गौ सेवकों ने मंगलवार को मालथौन रोड पर चक्का जाम कर जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन शासन-प्रशासन द्वारा 164 आवेदन-ज्ञापनों के बावजूद कार्रवाई न करने पर फूटे गुस्से का नतीजा था, जिसमें संगठनों ने अपनी चार प्रमुख मांगों को लेकर रोड पर मोर्चा संभाला।
उनकी मुख्य मांगों में समस्त सागर जिले में गोचर भूमि को कथित अतिक्रमण से मुक्त कराना, देवल गो अभयारण्य (जिसकी कुल 3614 एकड़ भूमि है) का पुनर्निर्माण कर उसे फिर से चालू करना, ग्राम खेराई के लगभग 30 अहिरवार परिवारों की जमीन और भेलैया की शासकीय भूमि को कब्जामुक्त कराना शामिल था। इसके अतिरिक्त, गौ सेवकों ने सिवनी मालवा में 14 गौ रक्षकों को मिली आजीवन कारावास की सजा पर पुनर्विचार की भी अपील की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कलेक्टर कार्यालय से लेकर तहसील और एसडीएम कार्यालय तक सैकड़ों आवेदन देने के बावजूद गोचर भूमि पर हुए कथित अतिक्रमण पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जिसके कारण गाय माताएं सड़कों पर भटक रही हैं, दुर्घटनाओं में मर रही हैं और भूख-प्यास से मजबूर हैं, जबकि लाखों एकड़ जमीन शासकीय कागजों में उनके नाम दर्ज है।
प्रदर्शनकारियों ने खेराई गांव में दबंगों पर अहिरवार समाज के करीब 30 परिवारों की जमीन पर कथित तौर पर अवैध कब्जा कर उन्हें जबरन बेदखल करने का आरोप लगाया। इसी तरह, ग्राम भेलैया में शासकीय भूमि के लगभग 40 एकड़ हिस्से पर अतिक्रमण की बात कही गई, जिसकी सूचना अधिकारियों को पहले भी दी जा चुकी थी। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि प्रभावित परिवारों को तुरंत न्याय मिले, उनकी जमीनें कब्जामुक्त कराई जाएं और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
चक्का जाम की सूचना मिलते ही मालथौन तहसीलदार मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से चर्चा कर उनका ज्ञापन स्वीकार किया। इस दौरान खिमलासा बरोदिया चौकी और मालथौन थाना पुलिस सहित संबंधित एसडीओपी का पर्याप्त बल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात था। प्रशासन द्वारा एक सप्ताह के भीतर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने चक्का जाम समाप्त कर दिया। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
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