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शहीद भरत भूषण तिवारी मामले में पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिसमें यह तीखा विरोध व्यक्त किया गया है कि करदाताओं के पैसे से वेतन लेने वाले पुलिसकर्मी खुद को मालिक समझ रहे हैं। आरोप है कि ‘साले नीच, जातिगत विद्वेष रखने वाले’ पुलिसकर्मियों ने एक निहत्थे व्यक्ति पर गोली चलाई।
आगे कहा गया है कि इन पुलिसकर्मियों ने अंडकोष पर गोली मारी, जिसका स्पष्ट उद्देश्य हर हाल में मृत्यु सुनिश्चित करना था। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा गया है कि पूरा देश सही-गलत को देख रहा है और इन ‘पापियों’ का सर्वनाश तय है।
इस मामले में चार प्रमुख मांगें रखी गई हैं। पहली मांग है कि दोषियों को फाँसी की सज़ा दी जाए। दूसरी मांग है कि भरत भूषण तिवारी जी को शहीद का दर्जा प्रदान किया जाए। तीसरी, मुख्यमंत्री सम्राट को उनके पद से तत्काल हटाया जाए। और चौथी मांग के तहत, भरत भूषण तिवारी के माता-पिता व बहनों के भरण-पोषण के लिए सरकार पाँच करोड़ रुपये का सहयोग दे और उनके छोटे भाई को सरकारी नौकरी प्रदान करे।
चेतावनी दी गई है कि यदि इन मांगों को नहीं माना जाता है, तो भरत भूषण तिवारी को न्याय दिलाने के लिए पूरे देश के क्रांतिकारी नौजवानों के साथ मिलकर एक ‘नई क्रांति’ का बिगुल बजा दिया जाएगा, जिसकी सम्पूर्ण ज़िम्मेदारी सरकार की होगी। ‘शहीद भरत भूषण तिवारी अमर रहें’ के नारे के साथ न्याय की यह पुकार उठाई गई है।
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