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बरेली में स्मार्ट सिटी के नाम पर बर्बादी: भाजपा सरकार से माँगा जवाब

ASHOK GUPTA

समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता मयंक शुक्ला ने बरेली शहर के विकास कार्यों पर गंभीर सवाल उठाते हुए भाजपा सरकार, जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन से जवाब तलब किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट सिटी के नाम पर हजारों करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद शहर की जनता आज भी टूटी सड़कों, यातायात जाम, अधूरी परियोजनाओं, बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक लापरवाही जैसी समस्याओं से जूझ रही है।

मयंक शुक्ला ने विशेष रूप से उन परियोजनाओं का उल्लेख किया जिनका उद्घाटन मुख्यमंत्री द्वारा किया गया था, लेकिन वे वर्षों बाद भी जनता के लिए समर्पित नहीं हो सकी हैं। इनमें स्काईवॉक, संजय कम्युनिटी हॉल परिसर का अमृत सरोवर और रेलवे स्टेशन के पास नगर निगम द्वारा निर्मित कॉम्प्लेक्स शामिल हैं, जो अब तक उपयोग में नहीं आ पाए हैं। उन्होंने इन परियोजनाओं पर खर्च किए गए करोड़ों रुपये की जवाबदेही तय करने की मांग की। इसके अतिरिक्त, उन्होंने काष्ठकला केंद्र की निर्माणाधीन परियोजना पर भी सवाल उठाए, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि इसे पहले बनाया गया, फिर तोड़ा गया और अब दोबारा निर्माण किया जा रहा है, जिससे इसकी पारदर्शिता पर गंभीर संदेह पैदा होता है। उन्होंने इसकी उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की। सीएम ग्रिड योजना के तहत दीनदयालपुरम क्षेत्र में विकास कार्यों की स्थिति भी खराब बताई गई, जहाँ तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी सड़कें टूटी हैं, पार्किंग व्यवस्था बदहाल है और पूरा क्षेत्र अव्यवस्थित है।

सपा नेता ने अन्य कई गंभीर मुद्दे भी उठाए, जैसे बरेली में लगातार बिगड़ता एयर क्वालिटी इंडेक्स, एम्स की स्थापना की दिशा में कोई ठोस पहल न होना, भूमि उपलब्ध न होने के कारण क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल का लखनऊ स्थानांतरित होना, 300 बेड के अस्पताल का पूरी क्षमता से संचालित न होना, और 100 बेड के यूनानी अस्पताल का जनता को पूरी तरह समर्पित न होना। उन्होंने डेलापीर में गौवंश की दुर्दशा, खुले मेनहोल, सुभाषनगर पुलिया की उपेक्षा, स्मार्ट मीटरों और ट्रैफिक सिग्नलों की निष्प्रभाविता, आईटी पार्क के लंबित निर्माण, तथा महंगी कॉपी-किताबों और ड्रेस के नाम पर अभिभावकों के आर्थिक शोषण जैसे मुद्दों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं, और किला ओवरब्रिज पर करोड़ों खर्च होने के बावजूद उसकी स्थिति खराब हो चुकी है, जबकि स्काईवॉक अब तक नहीं खोला गया है।

अंत में, मयंक शुक्ला ने स्पष्ट किया कि बरेली की जनता को केवल उद्घाटन और घोषणाएं नहीं, बल्कि धरातल पर वास्तविक विकास चाहिए। उन्होंने अधूरी परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने, दोषियों की जवाबदेही तय करने और जनता के धन का पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करने की मांग की। इसके साथ ही, उन्होंने राम मंदिर से करोड़ों रुपए की चोरी के मामले में सीबीआई जांच और मंदिर निर्माण में इस्तेमाल हुए ईंट, सरिया, सीमेंट की गुणवत्ता की जांच की भी मांग की।



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