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कटिहार में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक शकील अहमद खान ने बिहार सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार के कार्यकाल में राज्य में दलितों, मुसलमानों और कमजोर वर्गों पर अत्याचार, मॉब लिंचिंग, हत्या, दुष्कर्म, लूट और अपराध की घटनाओं में लगातार वृद्धि हुई है, जिसके चलते बिहार में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।
शकील अहमद खान ने हाल की कई घटनाओं का जिक्र करते हुए सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने सिवान के बड़हरिया में शहजाद शाह की कथित मॉब लिंचिंग में हुई हत्या, बिहारशरीफ में पिंटू पासवान और श्रवण पासवान की हत्या, विजय कुमार प्रजापति की हत्या, तथा दरभंगा में फैज की हत्या का उदाहरण दिया और कहा कि ये वारदातें दर्शाती हैं कि बिहार में अपराधियों का मनोबल बढ़ा हुआ है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इन मामलों में सरकार की ओर से न तो त्वरित और न ही प्रभावी कार्रवाई की गई, बल्कि आरोपियों को जल्द ही जमानत भी मिल गई। खान के अनुसार, सरकार को दोषियों को कड़ी सजा दिलाने का प्रयास करना चाहिए था, लेकिन वह इस दिशा में गंभीर नहीं दिख रही, जिससे गरीब, दलित और कमजोर वर्ग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और सरकार उनकी समस्याओं पर मौन है।
इन्हीं गंभीर मुद्दों को लेकर 9 जुलाई को सुबह 11 बजे राजगीर स्थित कन्वेंशन सेंटर में एक बड़े सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इस सम्मेलन में विशेष रूप से दलित, मुस्लिम और अतिपिछड़ा समाज के लोग शामिल होंगे, जहां बिहार में बढ़ते अपराध, कानून-व्यवस्था की स्थिति और संविधान की रक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। पूर्व विधायक ने लोगों से इस सम्मेलन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील करते हुए चेतावनी दी कि यदि सरकार कानून-व्यवस्था को नियंत्रित करने में विफल रहती है और प्रशासन बेलगाम बना रहता है, तो इसके खिलाफ एक व्यापक जन आंदोलन की आवश्यकता होगी। उन्होंने अपने नारे— “दलित-मुस्लिम मैदान में, संविधान के सम्मान में”— को दोहराते हुए कहा कि संविधान सभी जातियों और समुदायों को समान अधिकार एवं सुरक्षा प्रदान करता है, लेकिन यदि संविधान की रक्षा करने वाले अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाएंगे, तो उसके मूल्यों को कमजोर किया जाएगा। खान ने समाज में बढ़ती नफरत की राजनीति पर भी गहरी चिंता व्यक्त की।
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