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पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हुई साढ़े चार करोड़ की नहर, निर्माण गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल

Balrampur

बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के ग्राम पंचायत भाला-परेवा में जल संसाधन विभाग की भाला-गिरवानी नहर परियोजना के तहत लगभग साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से बन रही कंक्रीट नहर पहली ही मूसलाधार बारिश में क्षतिग्रस्त हो गई। निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही नहर में दरारें पड़ने और एक हिस्सा टूटने की घटना ने निर्माण की गुणवत्ता तथा विभागीय निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि नहर निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएं बरती जा रही हैं। उनके अनुसार, निर्माण शुरू होने के महज 15 दिनों के भीतर ही नहर में दरारें पड़नी शुरू हो गई थीं, जिसके बावजूद कार्य में कोई सुधार नहीं किया गया। ग्रामीणों ने निर्माण में गुणवत्ताहीन सामग्री के उपयोग और कंक्रीट की आवश्यक क्योरिंग (पटाई) मानकों के अनुरूप न होने की बात कही है।

किसान सरवन सोनी, इफ्तेखार खान, विनीत गुप्ता और रामकुमार धुर्वे सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर कई बार जल संसाधन विभाग के इंजीनियर, एसडीओ एवं अन्य अधिकारियों को लिखित और मौखिक शिकायतें दीं। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी पूरे मामले की जानकारी दी गई, लेकिन शिकायतों के बावजूद निर्माण कार्य में कोई सुधार नहीं हुआ। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि निर्माण स्थल पर विभाग के जिम्मेदार इंजीनियर नियमित रूप से मौजूद नहीं रहते थे, और ठेकेदार के तकनीकी कर्मचारी भी अधिकांश समय अनुपस्थित रहते थे, जिससे निर्माण कार्य की प्रभावी निगरानी नहीं हो सकी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जल संसाधन विभाग के कुछ अधिकारी एवं कर्मचारियों की ठेकेदार से मिलीभगत के कारण लापरवाही बरती गई और करोड़ों रुपये की परियोजना में भ्रष्टाचार किया जा रहा है, जिसकी असलियत पहली बारिश में नहर के क्षतिग्रस्त होने से सामने आ गई है।

ग्रामीणों ने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य भाला और विजयनगर क्षेत्र के सैकड़ों किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच नहीं कराई गई तो भविष्य में पूरी परियोजना प्रभावित हो सकती है और सरकारी धन की बर्बादी होगी। ग्रामीणों और किसानों ने जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने, निर्माण गुणवत्ता की निष्पक्ष समीक्षा करने तथा दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।



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