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बिहार के दरभंगा की रहने वाली 7वीं कक्षा की छात्रा संध्या शर्मा का एक मैथिली लोकगीत सोशल मीडिया पर इस कदर वायरल हुआ कि बनारस के बड़े संगीत पारखी और दरभंगा के भरवाड़ा स्थित ‘संत केशव दास कला संगीत महाविद्यालय’ के संस्थापक, प्रोफेसर दास पुष्कर खुद उनका हुनर देखने और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए उनके घर पहुंच गए। सोशल मीडिया की ताकत ने संध्या की इस अद्भुत प्रतिभा को रातों-रात दुनिया के सामने लाकर खड़ा कर दिया है।
दरभंगा के डी.ए.वी स्कूल में पढ़ने वाली संध्या ने जब अपनी सुरीली आवाज में ‘स्वर्ग सों सुंदर मिथिला धाम…’ और महादेव की नचारी ‘बरदूल का शिब नगरिया…’ गाकर सुनाया, तो हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया। संध्या की सादगी और सुरों की बेहतरीन समझ ने बड़े-बड़े संगीत प्रेमियों का दिल जीत लिया है।
संध्या के इस टैलेंट से प्रभावित होकर प्रोफेसर दास पुष्कर ने बताया कि कला और संगीत के क्षेत्र में करियर की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। चंडीगढ़ के ‘प्राचीन कला केंद्र’ से संबद्ध उनका संस्थान मात्र न्यूनतम फीस में इन बच्चों को ‘चित्र विशारद’ और ‘संगीत भूषण’ जैसी यूजीसी से मान्यता प्राप्त बड़ी डिग्रियां प्रदान कर रहा है, जहां से रवि कुमार जैसे कई छात्र 5 साल का फाइनल डिप्लोमा भी पूरा कर चुके हैं। इन डिग्रियों के जरिए ये बच्चे भविष्य में संगीत, ड्राइंग, पेंटिंग और डांस टीचर के रूप में देश के केंद्रीय और सरकारी स्कूलों में काम कर सकते हैं, साथ ही भारतीय रेलवे के ‘कल्चरल कोटा’ के तहत सीधे नौकरियों के अवसर भी पा सकते हैं। संध्या जैसी छोटी सी बच्ची की यह उड़ान साबित करती है कि अगर प्रतिभा को सही मार्गदर्शन मिले, तो उसे आसमान छूने से कोई नहीं रोक सकता।
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