बीते कुछ दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण रामगंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है। नदी के उफान पर आने से अरवल क्षेत्र के ढकपुरा, बारामऊ, दहेलिया और सुलखामऊ समेत आसपास के तटीय गांवों में एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। तटीय इलाकों के निवासी नदी के पल-पल बदलते जलस्तर पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और रात की नींद उड़ गई है।
पिछले वर्षों में गर्रा और रामगंगा के उफान से हुई भारी तबाही की यादें ग्रामीणों में फिर से ताजा हो गई हैं। तब खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह जलमग्न हो गई थीं और कई परिवारों को अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी थी। ग्राम ढकपुरा की निवासी और स्थानीय कलाकार काजल सिसोदिया (डांसर) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के माध्यम से अपने गांव की यह समस्या सामने रखी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि बीते वर्षों जैसा ही मंजर इस बार भी दोहराए जाने का डर सता रहा है।
हालांकि, तहसील और जिला प्रशासन की तरफ से अभी बाढ़ को लेकर कोई आधिकारिक अलर्ट जारी नहीं किया गया है, फिर भी ग्रामीण अपने स्तर पर पूरी सतर्कता बरत रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि नदी के जलस्तर की चौबीसों घंटे निगरानी की जाए और समय रहते सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, ताकि स्थिति बिगड़ने पर तुरंत राहत कार्य शुरू हो सके। मौसम विभाग के अनुसार यदि बारिश का सिलसिला यूं ही जारी रहा, तो रामगंगा का जलस्तर विकराल रूप ले सकता है, जिससे तटीय इलाकों में कटान और जलभराव का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।
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