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मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में रविवार शाम को हुआ रेल हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि अफवाहों के खतरनाक परिणामों का एक भयावह उदाहरण बनकर सामने आया है। कुछ ही मिनटों में फैली एक झूठी सूचना ने यात्रियों में इतना भय पैदा कर दिया कि लोग चलती ट्रेन से उतरकर अपनी जान बचाने की कोशिश करने लगे, लेकिन यही कोशिश उनके लिए मौत का कारण बन गई। इस दर्दनाक हादसे में तीन महिलाओं और एक मासूम बच्चे सहित चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जिसके बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है।
यह घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब खजुराहो से उदयपुर जा रही उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस अपने निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ रही थी। ट्रेन जब मुरैना जिले के हेतमपुर स्टेशन के पास पहुंची, तभी किसी ने ट्रेन में आग लगने की अफवाह फैला दी। कुछ यात्रियों ने धुआं या किसी तकनीकी गड़बड़ी की आशंका जताई, जिसके बाद यह अफवाह तेजी से पूरे डिब्बों में फैल गई। घबराहट के माहौल में कई यात्रियों ने बिना सत्यता जांचे ही चेन पुलिंग कर दी। ट्रेन के रुकते ही लोग जान बचाने के लिए नीचे उतरने लगे, कुछ सीधे पटरी पर कूद गए तो कई लोग ट्रेन से दूर जाने के लिए दूसरे ट्रैक की ओर बढ़ गए।
जिस समय यात्री आग से बचने की कोशिश में ट्रैक पर खड़े थे, उसी दौरान दूसरे ट्रैक पर तेज गति से पातालकोट एक्सप्रेस आ रही थी। अचानक सामने बड़ी संख्या में लोगों को देखकर कुछ समझ पाना मुश्किल था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ यात्रियों ने ट्रेन को आते देख भागने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। कुछ ही सेकंड में पातालकोट एक्सप्रेस कई यात्रियों को अपनी चपेट में लेते हुए आगे निकल गई।
इस हादसे में जिन चार लोगों की मौत हुई उनमें आफरीन (35 वर्ष), अशद (4 वर्ष), शकुंतला (60 वर्ष) और वीरमा देवी (58 वर्ष) शामिल हैं। चार वर्षीय अशद की मौत ने इस पूरे हादसे को और भी अधिक दर्दनाक बना दिया है। परिवार के लोग इस सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं, वहीं स्थानीय प्रशासन मृतकों के परिजनों से संपर्क कर सहायता उपलब्ध कराने में जुटा है।
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