बहराइच के नानपारा स्थित राहत जनता इंटर कॉलेज में बज़्म-ए-राहत कमेटी के तत्वावधान में रविवार को माहना तरही नशिस्त का आयोजन किया गया। इस अदबी कार्यक्रम की सरपरस्ती राहत जनता इंटर कॉलेज के प्रबंधक अरशद खान ने की, जबकि हसन शंकरपुरी बतौर मेहमान-ए-खुसूसी शामिल हुए। नशिस्त की निज़ामत शहीद नानपारवी ने की। इस आयोजन में स्थानीय और आमंत्रित शायरों ने अपने बेहतरीन कलाम पेश कर पूरी महफिल को अदबी रंग में रंग दिया।
कार्यक्रम में मौजूद श्रोताओं ने शायरों के एक से बढ़कर एक अशआर पर जमकर दाद दी। तरही नशिस्त के दौरान शम्स नानपारवी ने पढ़ा—’चैन से बैठा हुआ हूँ आस्ताने यार पर, मिल गई है आज मेरी आखिरी मंजिल मेरी।’ आसिफ नानपारवी ने सुनाया—’जाने कब से मैं भटकता फिर रहा हूँ राह में, एक न एक दिन मिल ही जाएगी मेरी मंजिल मुझे।’ शहीद नानपारवी ने अपना कलाम पेश किया—’मेरी ख़ामोशी ने मक़तल तक मुझे पहुँचा दिया, कितनी आसानी से देखो मिल गई मंजिल मुझे।’ रोशन नानपारवी ने पढ़ा—’फन कुचलने का हुनर मालूम है अच्छी तरह, बस मिले इक बार वही शाख़-ए-संदल मुझे।’ हसन शंकरपुरी ने शेर पेश किया—’अक़्ल इज़हारे तमन्ना के लिए चुप थी मगर, दे गई दीवानगी ये जुर्रते-कामिल मुझे।’ ध्यान प्रकाश श्रीवास्तव (एडवोकेट) ने पढ़ा—’सूरज की ज़िंदगी में बस इक अधूरा इश्क़ था, जिसकी खातिर उम्र भर दुनिया लगी मुश्किल मुझे।’ इनके अलावा सफ़ीर नानपारवी सहित अन्य शायरों ने भी अपने-अपने कलाम पेश कर महफिल की रौनक बढ़ाई।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि ऐसे अदबी कार्यक्रम समाज में आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे को बढ़ावा देने के साथ-साथ उर्दू अदब और शायरी की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आयोजन के दौरान नानपारा की अदबी फिज़ा में शेर गूंजते रहे और देर तक दाद बजती रही।
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