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यह पोस्ट महाकाल के प्रति गहरी और अटूट श्रद्धा व्यक्त करती है, जिसमें कहा गया है कि महाकाल जब भी कुछ देते हैं, तो वह ना तो गिनकर होता है और ना ही तोलकर, बल्कि वे दिल खोलकर सब कुछ प्रदान करते हैं। भक्त स्वयं को महाकाल नाम की शमा के छोटे से परवाने और उनके सच्चे दीवाने बताते हैं, इस बात पर ज़ोर देते हुए कि दुनिया के कहने से उनकी भक्ति पर कोई असर नहीं पड़ता।
भक्तों का अटल विश्वास है कि कर्ता (कर्म करने वाला) कुछ भी नहीं कर सकता, वही होता है जो शिव चाहते हैं, और तीनों लोकों व नौ खंडों में महाकाल से बड़ा कोई नहीं है। पोस्ट में एक मार्मिक प्रार्थना भी की गई है कि अगर मृत्यु को स्वीकार किया जाए, तो बस इतनी इच्छा है कि चिता की राख से बाबा महाकाल की भस्मा आरती हो। यह भी दृढ़ता से कहा गया है कि अकाल मौत उसे मिलती है जो नीच या चंडाल के समान कर्म करता है, जबकि महाकाल के सच्चे भक्त का स्वयं काल भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
आगे यह भाव प्रकट किया गया है कि अमीर बनने का कोई अर्थ नहीं, क्योंकि महाकाल तो स्वयं फकीर के दीवाने हैं, जो सादगी और भक्ति को अधिक महत्व देते हैं। अंत में, महाकाल का नारा लगाकर दुनिया में छा जाने का दावा किया गया है, और कहा गया है कि दुश्मन भी छिपकर यह कहने को मजबूर हो जाते हैं कि देखो, महाकाल का भक्त आ गया।
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