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समस्तीपुर सदर अस्पताल में रविवार, 6 जुलाई ’26 की रात करीब 8 बजे इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉ. पी.डी. शर्मा के गायब रहने से स्नैक बाईट और अन्य गंभीर मरीज परेशान थे। मरीजों के परिजनों ने जब पत्रकार श्रवण कुमार से इसकी शिकायत की, तो पत्रकार ने खाली ऑफिस का वीडियो बनाया।
इसी बीच, डॉक्टर के संपर्क के किसी व्यक्ति ने उन्हें सूचना दी, जिसके बाद डॉ. शर्मा जल्दबाजी में इमरजेंसी के सामने पहुँचे। पत्रकार ने उनसे ड्यूटी से गायब रहने को लेकर सवाल किए। डॉक्टर इमरजेंसी कक्ष में गए और जब पत्रकार उनके पीछे पहुँचा, तो डॉ. शर्मा ने पत्रकार को अपमानित करते हुए पहले हाथ पकड़कर और फिर गर्दन में हाथ डालकर कक्ष से बाहर धकेल दिया।
विदित हो कि सदर अस्पताल में 60 से अधिक नामी-गिरामी चिकित्सक तैनात हैं, पर उनमें से अधिकतर मैनेज कर इमरजेंसी और ओपीडी से गायब रहते हैं। भाकपा माले के जिला स्थाई समिति सदस्य और चर्चित आंदोलनकारी सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने इस घटना को निष्पक्ष पत्रकारिता पर हमला बताया। उन्होंने सिविल सर्जन और जिला प्रशासन से घटना की जांच कर दोषी चिकित्सक को निलंबित करने की मांग की है, अन्यथा आंदोलन चलाने की घोषणा की।
सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि डॉ. पी.डी. शर्मा पहले भी विवादास्पद रहे हैं। उन पर दलाल रखकर सदर अस्पताल से रोगियों को निजी अस्पतालों में भेजने का आरोप लगता रहा है। उन पर यह भी आरोप है कि वे समस्तीपुर शहर के दर्जनों निजी अस्पतालों को अपना डिग्री और रजिस्ट्रेशन नंबर देकर उनका संचालन कराते रहे हैं और वहाँ ऑपरेशन कर मोटी कमाई करते हैं। माले नेता के अनुसार, डॉ. शर्मा ने पहले भी उनके कृत्यों का विरोध करने वाले रोगियों, उनके परिजनों, सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को अपमानित किया है। सिंह ने दावा किया कि उनके पास इन आरोपों के साक्ष्य और गवाह मौजूद हैं, और यदि आरोपी चिकित्सक पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जनहित में आंदोलन का रास्ता अपनाएँगे।
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