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दमोह जिले के जबेरा विकासखंड के अर्थखेड़ा से जिला ब्यूरो चीफ अरविन्द सिंह लोधी की रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल भवन पूरी तरह जर्जर होने के कारण 43 छात्र-छात्राएं यज्ञशाला में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्कूल भवन कभी भी गिर सकता है, जिससे मासूम बच्चों की जान को हर वक्त गंभीर खतरा बना हुआ है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि विद्यालय की मरम्मत के लिए 09 अप्रैल 2025 को गौण खनिज मद से ₹2.25 लाख की राशि स्वीकृत की गई थी। उनका आरोप यह भी है कि इसमें से लगभग ₹1,11,800 की राशि बिलों के माध्यम से निकाली जा चुकी है, लेकिन अब तक धरातल पर मरम्मत का कोई भी कार्य नहीं कराया गया। दूसरी तरफ, बीआरसी का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए विद्यालय को पहले बिजोरा में संचालित करने की अनुमति दी गई थी, लेकिन स्थानीय परिस्थितियों के चलते फिलहाल यज्ञशाला में कक्षाएं लगाई जा रही हैं। इसके साथ ही बीआरसी ने इस मामले में पंचायत स्तर पर बड़ी लापरवाही होने की बात भी कही है।
अब प्रशासन की कार्यप्रणाली पर यह गंभीर सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर इन 43 मासूमों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, या समय रहते विद्यालय की मरम्मत कर बच्चों को सुरक्षित शिक्षा का अधिकार दिलाया जाएगा? ग्रामीणों द्वारा मरम्मत राशि के उपयोग को लेकर लगाए गए इन आरोपों की निष्पक्ष जांच संबंधित प्रशासन द्वारा किया जाना बेहद आवश्यक है।
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